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जीपीएस वॉच करेगी वाच 

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जीपीएस वॉच करेगी वाच

NMMC बांटेगी 11 करोड़ की घड़ी

> नागपुर में शुरू जीपीएस मॉनिटरिंग की नकल

> महासभा और स्थायी समिति को बताए बिना प्रशासन ने लाया प्रस्ताव

मुंबई। नवी मुंबई महानगरपालिका में तकनीक के नाम पर होनेवाला भ्रष्टाचार अब अपने चरम पर पहुंच चुका है। पालिका में नए कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर अपनी आर्थिक बजट का रोना रोनेवाली नवी मुंबई महानगरपालिका नई-नई तकनीकों के नाम पर प्रतिवर्ष सैकड़ों करोड़ रुपए लुटाने का कार्य कर रही है। पहले कर्मचारियों की उपस्थिति को जांचने के लिए बॉयोमेट्रिक प्रणाली के नाम पर करोड़ों रुपये की निविदा मंजूर की गई। अब एक ऐसी घड़ी को किराए पर लेने की निविदा निकाली गई है, जो जीपीएस सिस्टम से जुड़ी होगी और इसके जरिए कौन कर्मचारी कहां मौजूद है, इस पर निगरानी रखी जा सकेगी। पालिका प्रशासन इस घड़ी के लिए 42 महीने में 11 करोड़ रुपए का भुगतान किराए के रूप में घड़ी आपूर्ति करनेवाली कंपनी को करनेवाला है।
शहर के सौंदर्यीकरण के नाम तरह-तरह के फाउंटेन लगाने की बात हो या फिर मलनि:सारण के शुद्धिकरण प्लांट की बात हो, कचरे के वैज्ञानिक पद्धति से वर्गीकरण की बात हो या मशीन से सड़क की सफाई का मुद्दा हो, बिजली बचाने वाले बल्ब की बात हो या पानी की गणना करनेवाले यंत्र की बात, इलेक्ट्रिक से चलनेवाली बस की बात हो या अस्पतालों और स्कूलों के यांत्रिक साफ-सफाई की बात, सब जगह नई-नई तकनीक को सामने रखकर जमकर सरकारी तिजोरी को खाली करने का कार्य किया जा रहा है। अब कर्मचारियों की उपस्थिति और उनके द्वारा किए जानेवाले कार्यों की निगरानी के नाम पर भी करोड़ों रुपए प्रतिवर्ष लुटाने का प्रयास किया जा रहा है।
पालिका आयुक्त पर भी तकनीक के आकर्षण का गहरा प्रभाव
> पालिका प्रशासन के इस निर्णय को कई सामाजिक कार्यकर्ता तकनीक के नाम पर पैसे की बर्बादी बता रहे हैं। उनके अनुसार पालिका प्रशासन ने इससे पहले भी तकनीक के नाम पर कई नई परियोजनाओं को अमल में लाने का प्रयास किया है, जो कुछ ही दिनों में टांय-टांय फिस्स हो गई है। उदाहरण के तौर पर पालिका ने अपने सभी प्रमुख कार्यालयों, सभी सफाई कामगारों की स्टील चौकियों और मुख्यालय में बॉयोमेट्रिक हाजिरी की व्यवस्था की, मगर यह व्यवस्था कुछ ही दिनों में टांय-टांय फिस्स हो गई। इसके बाद नवी मुंबई महानगरपालिका परिवहन की सभी बसों में जीपीएस प्रणाली बिठाई गई, मगर यह प्रणाली भी कुछ ही दिनों में टांय-टांय फिस्स हो गई।
> नवी मुंबई के सभी तालाबों और कई उद्यानों में आकर्षक फाउंटेन और आकर्षक रोशनाई लगाने का कार्य किया गया, मगर इस व्यवस्था ने भी कुछ ही दिनों में दम तोड़ दिया। सड़कों की सफाई मशीन और यांत्रिक साफ-सफाई के नाम पर पालिका में कितने बड़े पैमाने पर घोटालों को अंजाम दिया गया है, यह किसी से छिपा नहीं है। ऐसे अनेक उदाहरणों का हवाला देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता राजीव मिश्रा ने कहा कि पालिका आयुक्त रामास्वामी जैसे समझदार व्यक्ति के होते हुए भी अगर इस तरह के निविदाओं को बिना पहले की पृष्ठभूमि जाने मंजूरी दी जाती है, तो इसका मतलब है कि वर्तमान पालिका आयुक्त पर भी तकनीक के आकर्षण का गहरा प्रभाव है।
जीपीएस घड़ी की मदद से सफाई कर्मचारियों की मॉनिटरिंग करने का प्रोजेक्ट नागपुर में शुरू किया गया है, इसलिए नवी मुंबई मनपा में भी शुरू करने का प्रस्ताव मनपा प्रशासन ने लाया है। इस प्रस्ताव के बारे में महासभा या स्थायी समिति को कोई भी जानकारी नहीं दी गई है। नागपुर में यह प्रोजेक्ट सफल हुआ है या फेल हुआ है, इसकी कोई जानकारी नहीं है। इसके साथ ही मॉनिटरिंग करने के लिए एक अलग से सर्वर रूम रखना पड़ेगा। वहां से कर्मचारी के माध्यम से इस पर नजर रखी जाएगी। इस बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं दी गई है। एक तरह से मनपा प्रशासन द्वारा जबरन यह प्रस्ताव लाया गया है।
– विश्वरथ नायर , विश्लेषक, नवी मुंबई मनपा
नवी मुंबई मनपा के पूर्व पालिका आयुक्त स्व. भास्कर वानखेड़े ने अपने कार्यकाल के दौरान एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था जिसमें 5 करोड़ से ज्यादा की किसी भी निविदा को मंजूरी देने से पहले एक विशेष तकनीकी समिति के जरिए उस निविदा को स्वीकृत किया जाना आवश्यक था। इस निविदा से जुड़े कार्य के पिछले 5 वर्ष के इतिहास को सामने रखना जरूरी था, मगर भास्कर वानखेड़े के पद से हटते ही उनके इस लिखित आदेश को भी दफना दिया गया।
– राजीव मिश्रा, सामाजिक कार्यकर्ता
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प्लास्टिक बंदी के नाम पर स्वच्छता निरीक्षक कर रहे वसूली  

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नवी मुंबई : नवी मुंबई महानगर पालिका के स्वच्छता विभाग एवं सेनेटरी विभाग के कर्मचारी स्वच्छता अभियान को छोड़ वसूली अभियान शुरू कर दिया है। बुधवार को दोपहर कोपर खैरने सेक्टर 2 में मनपा की उपद्रव शोध पथक गाड़ी आई और उसमें से एक कर्मचारी उतरकर एक फेरीवाले के ठेले से जबरन आम की थैली लेकर वापस गाड़ी में बैठता है लेकिन उसे क्या पता कि मेरी यह हरकत किसी के कैमरे में कैद हो रही है । उक्त ब्यक्ति ने जब उस कर्मचारी के पास जाकर पूंछा कि आप मनपा के अधिकारी हैं तो वह भड़क गया, उसी दौरान वहां मौजूद एक पत्रकार भी पहुंच गया और उस अधिकारी से बात करने लगा तो आम की थैली एक गाड़ी के पिछे फेंककर भागने लगा, आखिरकार पत्रकार को शक हुआ तो गाड़ी को रोककर पुलिस को फोन किया । उसी बीच मनपा का एक अधिकारी आया और अपने उस कर्मचारी की गलतियों पर परदा डालते हुए उक्त पत्रकार को ही धमकी देने लगा कि सरकारी कामकाज में दखल डालने के मामले में तुम्हारे खिलाफ शिकायत दर्ज होगा, उसकी इस तरह की बयानबाजी से मामला तूल पकड़ लिया और यह मामला कोपर खैरने पुलिस स्टेशन में जा पहुंच लेकिन वहां पहुंचने के बाद जब विडियो देखा गया और वहां मौजूद पत्रकारों को देख उस अधिकारी की बोलती बंद हो गई । जिस तरह से मनपा कर्मचारी की गलती पर पर्दा डालते हुए उक्त अधिकारी ने पत्रकार पर ही रौब झाड़ने लगा उससे तो ऐसा ही लगता है कि स्वच्छता अभियान को छोड़कर कोपर खैरने के मनपा अधिकारी वसूली अभियान चला रहे हैं ?

नवी मुंबई मनपा में 1200 करोड़ का टैक्स घोटाला

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मुंबई। नवी मुंबई महानगरपालिका का संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) विभाग एक बार फिर बड़े घोटाले को लेकर चर्चा में है। इस विभाग में 1200 करोड़ का टैक्स घोटाला सामने आया है। इस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी फर्जी कागजातों के आधार पर अवैध झोपड़ियों, मकानों और इमारतों के प्रॉपर्टी टैक्स का बिल जारी कर रहे हैं। ज्ञात हो कि एक-एक बिल के बदले 15 से 20 हजार रुपए की वसूली की जा रही है। इतना ही नहीं जिन उद्योगपतियों और भवन निर्माताओं का संपत्ति कर बड़े पैमाने पर बकाया है, उनकी राशि को कम करने का भी एक बड़ा खेल इस विभाग में जारी है। कुछ मामलों में तो बैक डेट का बिल भी जारी किया जा रहा है, जिससे वर्ष 2015 तक के सभी अवैध निर्माण कार्यों को अधिकृत किए जाने के नियम के तहत, उन्हें इसका फायदा मिल सके।
कुछ ऐसे दस्तावेज प्राप्त हुए हैं, जिसमें एक एक घरपट्टी पर 50-50 संपत्ति कर के बिल जारी किए गए हैं और आश्चर्य की बात यह है कि ऐसे घोटालों की संख्या सैकड़ों में है। दरअसल संपत्ति कर के बिल को प्रॉपर्टी कार्ड का दर्जा प्राप्त है, इसलिए जहां कहीं भी अवैध बहुमंजिली इमारतों का निर्माण किया गया है, वहां पहले एक घरपट्टी के नाम पर संपत्ति कर का बिल जारी किया गया और बाद में उसी घरपट्टी के ऊपर अलग-अलग रूम की संख्या डालकर अनेक संपत्ति कर के बिल जारी कर दिए गए। संपत्ति कर का बिल जारी किए जाने के नियम के मुताबिक इसके लिए कई प्रकार के दस्तावेजों की जरूरत होती है, मगर नवी मुंबई पालिका के संपत्ति कर विभाग में 15 से 20 हजार की रकम के आगे सारे दस्तावेज के महत्व नगण्य हो जाते हैं।
नवी मुंबई मनपा संपत्ति कर विभाग के अधिकारियों के भ्रष्टाचार इतने फैल गए हैं कि वे बड़े-बड़े उद्योगपतियों और भवन निर्माताओं के लाखों करोड़ों रुपए की संपत्ति कर गुलाबी नोट के प्रभाव में आकर माफ कर रहे हैं। इसके लिए विभाग के अधिकारी सारे नियम कानून को ताक पर रख इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। इस तरह से अवैध समझौतों का खेल शुरू हो जाता है। इस मामले में संपत्ति कर विभाग के उपायुक्त अमरीश पटनीगिरी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हुआ।
संपत्ति कर विभाग में 1200 करोड़ के इस घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद मैंने इसकी शिकायत वर्तमान आयुक्त रामास्वामी से की है, लेकिन अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कोई जांच भी नहीं हुई है। पूर्व पालिका आयुक्त तुकाराम मुंढे के कार्यकाल के दौरान 1200 करोड़ के संपत्ति कर घोटाले की बात सामने आई थी, जिसकी जांच रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। लेकिन इसके बावजूद इस विभाग में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। इस संदर्भ में कुछ ठोस सबूत मनपा आयुक्त के सामने पेश किया गया है और यह मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण की जांच गंभीरता से की जानी चाहिए।