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संभाजी भिडे और उसके साथियों पर सरकार मेहरबान

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संभाजी भिडे और उसके साथियों पर सरकार मेहरबान

> एक वर्ष में 41 केस सरकार के निर्देश पर लिए वापस

> भाजपा और शिवसेना के नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं के दर्जनों केस वापस

> अब तक 6 दंगों के केस वापस

मुंबई। देश में जनता शांतिपूर्वक एवं भयमुक्त रहे इसके लिए देश में कई सख्त कानून बनाए गए हंै। मगर जब सरकार ही अपने वोट बैंक की राजनीति के चक्कर में संभाजी भिड़े जैसे हजारों राजनेताओं और कार्यकर्ताओं जो दंगा जैसे संगीन अपराध को वापस लेने का निर्णय लेती है, तो देश में कानून व्यवस्था कैसे कायम रहेगा। फौजदारी प्रक्रिया दंड संहिता की धारा 321 प्रावधानों के तहत राज्य सरकार को अधिकार है कि, मामूली किस्म के अपराध में केस वापस ले सकती है। 7 जून 2017 से 14 सितंबर 2018 तक फडणवीस सरकार संभाजी भिडे और उसके साथियों सहित सैकड़ों राजनेताओं पर दंगा जैसे गंभीर अपराधों को वापस लेने का निर्णय लिया है ऐसी जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता एवं अधिकार फाउंडेशन के अध्यक्ष शकील अहमद शेख को गृह विभाग की सूचना अधिकारी तथा कक्ष अधिकारी प्रज्ञा घाटे ने दी है ।
  • > आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख ने गृह विभाग से मांग किया कि 2008 से अब तक कुल कितने राजनेताओं अथवा कार्यकर्ताओं के केस वापस लिया है। कितने सामान्य लोगों का केस वापस लिया है।
  • > इस सन्दर्भ में गृह विभाग की सूचना अधिकारी तथा कक्ष अधिकारी प्रज्ञा घाटे ने शकील अहमद शेख को जानकारी उपलब्ध कराईं है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जून 2017 में संभाजी भिड़े और उनके साथियों के खिलाफ 3 केस वापस लिया है।

2017 से 14 सितंबर 2018 तक 41 केस लिए वापस

> 2008 से 2014 तक कांग्रेस और एनसीपी की आघाडी सरकार ने कोई भी केस वापस नहीं लिया है। वही 2014 में भाजपा की सरकार आने के बाद जून 2017 से 14 सितंबर 2018 तक 8 शासन निर्णय जारी करके कुल 41 केसों में हजारों आरोपियों का केस वापस लिया है। ज्यादातर फडणवीस सरकार ने भाजपा और शिवसेना के विधायक और कार्यकर्ताओं या समर्थक के खिलाफ केस वापस लिया है।
कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कोरेगांव केस में आरोपी संभाजी भिड़े को क्लीन चिट दे चुके हैं।
> गौरतलब हो कि फडणवीस सरकार ने जितने भी 41 केसों को वापस लिया है। सबके सब दंगा फैलाना, सरकारी सम्पति को नुकसान पहुंचाना, सरकारी काम में बाधा डालना, और सरकारी कर्मचारी पर हमला करना जैसे संगीन अपराध दर्ज थे।

केस वापस लिए गए नेताओं की सूची

नाम पद व दल केस संख्या
राजू शेट्टी और अन्य सांसद, शेतकरी पक्ष 9/2015
संजय घाटगे पूर्व भाजपा तथा शिवसेना नेता 138/2006
नीलम गोºहे विधायक, शिवसेना 512/2010
मिलिंद नार्वेकर उद्धव ठाकरे के पीए, शिवसेना 512/2010
संजय (बाला) भेडगे भाजपा नेता 133/2011
प्रशांत ठाकुर विधायक भाजपा 03/2016
विकास मठकरी भाजपा 268/2010
अनिल राठोड नेता शिवसेना 198/2011
अभय छाजेड नेता कांग्रेस 33/2015
अजय चौधरी विधायक, शिवसेना 58/2005
डॉ. दिलीप येलगावकर विधायक,भाजपा 66/2013
आशीष देशमुख विधायक, भाजपा 14/2017
किरन पावसकर एमएलसी, एनसीपी 41/2016
सामान्य लोगों के वापस लिए गए केस
नाम जिला केस नंबर
अजय यादव व अन्य अमरावती 3041 / 15
संभाजी भिड़े सांगली 32/08,38 /08
हनुमंत पवार व अन्य सांगली 35 / 08
सागर गोविंदप्रकाश शर्मा मुंबई 05/14
सुधीर पाठक व अन्य नागपुर शहर 389 / 1999
दिलीप विट्ठल मोहिते व अन्य पुणे शहर 138 / 2005
विजय बापू मोहिते पुणे 40/2006
कनक मोहनलाल परमार मुंबई 101/15
चनप्पा रामचंद्र होर्तिकर सांगली 51 / 12
प्रफुल अग्रवाल व अन्य गोंदिया 97/2016
कुशेंद्र शिंदे रायगड 04/ 2016
मनीषा गुलाबराव पाटिल धुले 61/2009
बालाजी हरिदास जाधव सातारा 46/2013
मतीन भोसले व अन्य अमरावती 223/2013
मच्छिंद्र पा धुमाल व अन्य अहमदनगर 80 /2010
दीपक रामटेक व अन्य गडचिरौली 24 /2013
मनोहर गणपति उंडगे व अन्य कोल्हापुर 100 / 2012
मधुकर पाटिल व अन्य कोल्हापुर 60/2008
आदमसाब अब्दुल,रहिमान मंगावकर कोल्हापुर 54/ 2008
शाम म्हात्रे व अन्य रायगड 22 / 2014
अविनाश म्हात्रे व अन्य रायगड 23/2014
मधुसुदन दादुजी पाटिल व अन्य पुणे ग्रामीण 181/20 08
अर्जुन पंढरीनाथ जाधव व अन्य नाशिक शहर 125 / 2017
बबन गंगाधर कोलसे पाटिल व अन्य कोल्हापुर 92 / 2012
आप्पासाहेब कासिम पवार कोल्हापूर 19 / 2015
प्रवीण मोतीराम उमाटे व अन्य चंद्रपुर 211 / 2012
फडणवीस सरकार ने पिछले चार वर्षों में एक भी सामान्य जनता का केस वापस नहीं लिया है। बल्कि जितने भी केस वापस लिए हैं। ज्यादातर भाजपा और सेना के नेता या कार्यकर्ता तथा समर्थकों के विरुद्ध केस वापस लिया है। क्या राज्य सरकार सिर्फ नेताओं के लिए है। इस सन्दर्भ में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस से मांग की है कि, वापस लिए गए केस निर्णय को तुरंत रद्द किया जाए।
– शकील अहमद शेख, आरटीआई कार्यकर्ता
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