Month: August 2018

ओशो की फर्जी हस्ताक्षर कर 800 करोड़ की लूट 

Posted on


ओशो की फर्जी हस्ताक्षर कर 800 करोड़ की लूट
  • बिना आरबीआई से अनुमति के विदेश ले गए बौद्धिक संपत्ति
  • ओशो के विदेशी संन्यासियों ने फर्जी हस्ताक्षर कर संपति पर डाला डाका
  • भारत को प्रतिवर्ष लाखों डॉलर रेवेन्यू का घाटा
मुंबई। ओशो के नाम से मशहूर रजनीश ने पूरे देश को अपने विचारों से झकझोर कर रख दिया था। एशिया से लेकर पश्चिमी देशों तक उनके इतने भक्त बने कि अमेरिकी राष्ट्रपति सहित 21 देशों की सरकारें हिल गर्इं। अब इसी ओशो के 800 करोड़ के करीब बौद्धिक संपत्ति का विवाद हाईकोर्ट में चल रहा है। उनकी मृत्यु के बाद उनके ही 6 विदेशी भक्तों ने इस संपत्ति पर डाका डालते हुए ओशो की फर्जी हस्ताक्षर के जरिए लूट कर विदेश ले गए हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस को ओशो (आचार्य रजनीश) की वसीयत की सत्यता जानने के लिए यूरोपियन यूनियन को पत्र लिखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह निर्देश एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया है, जिसमें ओशो के ही एक शिष्य ने संपत्ति की लूट को भारत वापस लाने के लिए वसीयत की सत्यता को कोर्ट में चैलेंज किया है।
गौरतलब हो कि ओशो की मौत 19 जनवरी 1990 को पुणे में हुई थी। दुनियाभर में उनके लाखों अनुयायी हैं। ओशो अपने पीछे इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (बौद्धिक संपत्ति) का भारी खजाना छोड़ गए हैं। इनमें नौ हजार घंटे के प्रवचन, 1870 घंटे के भाषण और करीब 850 पेंटिंग शामिल हैं। उनके वक्तव्यों पर आधारित 650 किताबें 65 भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। इस बौद्धिक संपत्ति से सालाना करोड़ों डॉलर की आमदनी होती है। याचिकाकर्ता ओशो के शिष्य योगेश ठक्कर (स्वामी प्रेम गीत) का आरोप है कि ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन के छह ट्रस्टियों ने देश से बाहर कंपनियां और ट्रस्ट बना रखे हैं। इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स की रॉयल्टी बिना आरबीआई से अनुमति लिए गैर-कानूनी तरीके से वहां ट्रांसफर की जा रही है।
पुणे आर्थिक अपराध शाखा को दिए थे जांच के आदेश
ठक्कर ने वर्ष 2012 में शिकायत की थी। पुणे के कोरेगांव पुलिस स्टेशन में वर्ष 2013 में ओशो आश्रम के छह विदेशी शिष्यों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
अपनी शिकायत में उन्होंने कहा है कि जिस वसीयत को वर्ष 2013 में यूरोपियन कोर्ट के समक्ष पेश की गई थी, वह वास्तव में ओशो द्वारा नहीं की गई है।
बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान ठक्कर के वकील ने बताया कि ओशो की मौत के 23 वर्ष बाद इस वसीयत को यूरोपियन कोर्ट में पेश किया गया गया, जबकि उनकी मौत भारत में ही हुई थी। जिन लोगों के खिलाफ ठक्कर ने शिकायत दर्ज कराई है, उनके पास ओशो की पेंटिंग, आॅडियो, वीडियो और किताबों के अधिकार प्राप्त हैं।
ओशो की बौद्धिक संपत्ति आरबीआई के फॉरेन एक्सचेंज के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर अवैध रूप से स्वीट्जरलैंड और अमेरिका ले गए हैं। ओशो के 6 विदेशी शिष्यों ने फर्जी हस्ताक्षर कर वसीयत बनाई है। इसकी सत्यता जांच कर विदेश में गई संपति को वापस लाने के लिए मुंबई हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। मेरा एक ही उद्देश्य है कि भारतीय संपत्ति भारत में आनी चाहिए। इसके कारण प्रति वर्ष भारत को लगभग लाखों डॉलर का नुकसान हो रहा है।
-योगेश ठक्कर, याचिकाकर्ता
ओशो की वसीयत पर मौजूद उनके दस्तखत और किताबों में मौजूद उनके दस्तखतों को मिलान के लिए वर्ष 2013 में हैंड राइटिंग एक्सपर्ट को भेजा गया था। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि इसकी रिपोर्ट जल्द ही मिल जाएगी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि ओशो के केयर टेकर एलेक्जेंडर अलिशा के पास उनकी वसीयत की असली प्रति का फटा हुआ हिस्सा मौजूद है और फिलहाल इसकी एक डुप्लीकेट कॉपी यहां पर भी मौजूद है।
– संगीता शिंदे , सरकारी वकील
800 करोड़
इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी
की कीमत
9000 घंटे
आॅडियो टेप (हिंदी और मराठी)
1,870 घंटे
वीडियो (हिंदी और मराठी)
80 देशों में
65 भाषाओं के बीच 650 पुस्तकें
19 जनवरी 1990 – ओशो की मृत्यु
1989 – बोगस मृत्यु पत्र बनाने का दावा
2012 – पुणे पुलिस कमीशन को पत्र
2013 – ट्रस्टियों के खिलाफ कोरेगांव पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज
2018 – एक महीने में आर्थिक अपराध शाखा को रिपोर्ट देने का आदेश
Advertisements

आॅनलाइन लॉटरी👉 सरकार को 10 हजार करोड़ का चूना

Posted on Updated on


आॅनलाइन लॉटरी 👉 सरकार को 10 हजार करोड़ का चूना

  • लॉटरी माफिया चौरसिया बंधुओं को पुलिस का संरक्षण

    कई राज्यों में फैला धंधे का जाल

कई राज्यों में फैला धंधे का जाल

दबंग दुनिया : नागमणि पांडेय
मुंबई। देशभर में आॅनलाइन लॉटरी चलाने वाले कंपनियों द्वारा हजारों करोड़ रुपए का चुना सरकार को लगा रही हैं। आॅनलाइन लॉटरी चलाने वाले लोगों को पुलिस का संरक्षण मिलने के कारण इसे रोक पाने में राज्य एवं केंद्र सरकार नाकाम साबित हो रही है। वर्ष 2017 और 18 में अवैध आॅनलाईन लॉटरी संचालकों के खिलाफ जो कार्रवाई हुई थी, वो नाकाफी साबित हो रहा है। चूंकि फिर से उन्हीं आरोपियों द्वारा वेब पोर्टल बदलकर आॅनलाईन लॉटरी का धंधा धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक प्रतिदिन करीब 10 से 15 हजार करोड़ के इस खेल में सरकार को टैक्स के नाम पर फूटी कौड़ी भी नहीं मिलती। इस मामले की लिखित शिकायत आरटीआई कार्यकर्ता जावेद अहमद खान ने राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुंबई पुलिस आयुक्त और सबंधित विभागों से की है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी आरटीआई कार्यकर्ता एंव भाजपा अल्पसंख्यक विभाग के पूर्व मुंबई उपाध्यक्ष जावेद अहमद खान कीशिकायत पर मुंबई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अचल चौरसिया पर आईपीसी की धारा 420, 294 (अ) आदि के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद आरोपियों को जमानत मिल गई।
नाम बदलकर कर रहे लॉटरी का कारोबार
जमानत मिलने के बाद फिर से उन्हीं लोगों ने अपना वेब पोर्टल का नाम बदलकर अवैध रूप से
आॅनलाईन लॉटरी का धंधा शुरू कर दिया है। बताया जाता है कि तेजी से फल-फूल रहे इस धंधे का जाल देश के कई राज्यों में फैला है। इतना ही नहीं अवैध रूप से चलने वाली आॅनलाईन लॉटरी का मास्टर माइंड इसे विदेशों में भी विस्तार करता जा रहा है। कयास लगाया जा रहा है कि विदेशों में मामला जमने के बाद यहां की टीम देश के अन्य घोटालेबाजों की तरह पुलिस और देश के कानून से दूर विदेश भाग सकते हैं। इन बातों का आभास होते ही खान ने 10 अगस्त 2018 को फिर से इस मामले की सख्ती से जांच व कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत की प्रति उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुंबई पुलिस आयुक्त, फाइनेंस मिनिस्टर (महाराष्ट्र सरकार), होम मिनिस्टरी और विपक्षी दलों व सबंधित विभागों को दी है। उक्त पत्र में कहा गया है कि अवैध रूप से आॅनलाइन लॉटरी चलाने वाला रमेश और अचल चौरसिया द्वारा बड़े पैमाने पर टैक्स की चोरी की जा रही है। इस मामले में चौरसिया बंधुओं पर मुंबई के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में दर्जनों मामले दर्ज हैं। इन पर सख्ती से कार्रवाई नहीं होने के कारण दोनो ने फिर से एक टीम बनाई है जो देश के अन्य राज्यों में फैलता जा रहा है। इसके अलावा टैक्स बचाने के लिए टीम का मास्टर माइड सरकार को गुमराह कर रहा है।
विधानसभा में मुद्दा उठने पर पुलिस ने किया कार्रवाई
टैक्स चोरी के इस मामले को 19 मार्च 2018 को विपक्षी नेता धनंजय मुंडे ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान उठाया था। इस मुद्दे को विधायक अनिल परन व अन्य विधायकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए मुंबई सायबर सेल ने गेमकिंग इंडिया प्रइवेट लिमिटेड और प्लानेट- जी के मालिक अचल रमेश चौरसिया को गिरμतार भी किया था। हालांकि गिरफ्तारी की भनक लगते चौरसिया बंधुओं ने http://www.gamekingindia. com से बदल कर http://www.gamekingworld. com रख दिया। इसके बावजूद साइबर सेल ने www.gamekingindia.com और www. planetgoonline.comको बंद कर दिया। खान के अनुसार इसके बावजूद पिता पुत्र द्वारा अवैध रूप से आॅन लाईन लॉटरी का धंधा वसई पश्चिम स्थित चौरसिया बंधुओं के घर चलाया जा रहा है।
चौरसिया बंधु सरकार और नागरिकों को लगा रहे चूना
खान के अनुसार मौजूदा समय में राजा चौरसिया उर्फ मुन्ना और उसका भाई रमेश चौरसिया इस खेल को बखूबी अंजाम दे रहे हैं। खान के अनुसार चौरसिया बंधुओं द्वारा सरकार के साथ-साथ आम जनता को भी बड़े पैमाने पर चूना लगाया जा रहा है। लिहाजा जांच कर इस गैंग का पदार्फाश करते हुए इन लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उक्त पत्र के अनुसार मुंबई साइबर सेल की जांच पड़ताल में साफ किया गया था कि इस गिरोह द्वारा प्रति दिन पांच करोड़ का टर्नओवर किया जाता है। ऐसे में अगर मुंबई पुलिस की माने तो चौरसिया बंधु सालाना 1800 हजार करोड़ का धंधा करते हैं लेकिन टैक्स के नाम पर सरकार को ठेंगा दिखा देते हैं। इस तरह 2012-13 से हिसाब लगाया जाए तो इन लोगों ने सरकार से करीब 9 हजार करोड़ की टैक्स चोरी की है। बताया जाता है कि सरकार से टैक्स चोरी व अवैध रूप से आॅनलाईन लॉटरी चलाने के मामले में चौरसिया बंधुओं पर 2017 से अब तक करीब 19 पुलिस केस हो चुका है। इसके बावजूद टैक्स चोरी और लॉटरी का धंधा चरम पर है।

108 एम्बुलेंस के ड्राइवर ने पुलिस के सामने पत्रकार पर किया हमला 

Posted on


108 एम्बुलेंस के ड्राइवर ने पुलिस के सामने पत्रकार पर किया हमला

  • बीवीजी के शराबी के पास महाराष्ट्र पुलिस का पहचानपत्र

  • पुलिस के सामने ही अपने आप को पुलिस बताकर दिया धमकी

मुंबई | बुधवार देर रात को सीएसटीएम -पनवेल लोकल में यात्रा कर रहे पत्रकार के साथ 108 के ड्राइवर द्वारा पुलिस के सामने ही मारपीट किये जाने का मामला सामने आया है | विशेष की शराब के नशे में धुत बीवीजी कंपनी के इस ड्राइवर के पास महाराष्ट्र पुलिस का एक पहचान पत्र भी मिला है | इस पहचान के माध्यम से अपने आप को पुलिस बताकर धमकी दे रहा | फिलहाल वाशी पुलिस मामला दर्ज कर जांच में जुटी है

गौरतलब है कि दैनिक दैनिक ‘दबंग दुनिया’ के पत्रकार नागमणि पांडेय रोजाना की तरह कार्यालयीन न्यूज कार्य पूर्ण करके कल बुधवार की रात भी सीएसटी से रात 12.24 की पनवेल ट्रेन पकड़कर यात्रा कर रहे थे। ट्रेन गोवंडी पहुचने पर बीवीजी (एम्बुलेंस) का एक ड्राइवर ट्रेन में चढ़ा। शराब के नशे में धुत यह ड्राइवर दरवाजे पर खड़ा हो गया, जहां ट्रेन चलने पर लटक भी रहा था। वह शराब के नशे में था। इसलिए उसे डिब्बे के सभी लोग देख रहे थे। तभी अचानक नागमणि के तरफ आकर गाली देते हुए बोला क्या देख रहा….। इसके बाद उसे पकड़कर मानखुर्द स्टेशन पर जीआरपी को दिया। वहां जीआरपी के सामने ही दो लाफा उसने मारा भी..। पुलिस और पत्रकार नागमणि ने द्वारा इस का विरोध किये जाने पर यह ड्राइवर अपने आप को पहले पुलिस वाला बताया और अपने पास का महाराष्ट्र पुलिस का पहचानपत्र दिखाया | इस पहचान पत्र के अनुसार उसका नाम मारुती सुरेश पारसे था | जो की घनसोली गाव का रहने वाला है | यह पहचान पत्र देख संदेह हुआ और उसे पुलिस उसके पास से जप्त कर लिया | इसके बाद उसे वंहा से वाशी जीआरपी लेकर जाया गया | 108 के ड्राइवर द्वारा पुलिस के सामने ही मारपीट किये जाने के बावजूद पुलिस ने सिर्फ एनसी लेकर ड्राइवर को सुबह छोड़ दिया |

वाशी जीआरपी के अधिकारी पवार बरती लापरवाही

वाशी जीआरपी में ड्राइवर को लेजाने के बाद उसकी जांच करने के बजाय पुलिस अधिकारी पवार ने इसे मामूली मामला बताया | शिकायत से पहले हि उसे सिर्फ एनसी बताते हुए न्याय के लिए कोर्ट जाने का बताने लगे | इतना ही नही जब ड्राइवर शराब पिने होने की जानकारी दिए जाने पर भड़कते हुए कहा की आप कैसे बोल सकते हो शराब पिया है | लेकिन उसका मेडिकल नही कराये | शराबी ड्राइवर को बचाने की कोशिस करते रहे | मेडिकल के लिए दिए लेटर में कंही भी शराब की जांच करने की मांग नही किया गया | जिसके कारण डॉक्टर ने शराब की जांच नही किया की वह शराब पिया है या नही |

ड्राइवर के पास मिला महाराष्ट्र पुलिस का पहचानपत्र

108 के शराबी ड्राइवर के पास से महाराष्ट्र पुलिस का पहचानपत्र मिला है | इसे वाशी जीआरपी के हवाले भी किया गया | इस पहचानपत्र के माध्यम से ही वह अपने आप को पुलिस बताने में जूटा था | इसके बावजूद पुलिस इस पहचानपत्र को गंभीरता से नही लिया है | इसके कारण इस की जांच करने की मांग किया गया है |

108 बीवीजी के डॉक्टर फर्जी शिकायतदर्ज कराने पहुंचे

घटना के दौरान पुलिस के सामने पत्रकार को मारने वाले शराबी ड्राइवर के समर्थन में शिकायत दर्ज करने कुछ डॉक्टर वाशी जीआरपी पहुंचे | यह डॉक्टर बताने में जुटे थे की ड्राइवर को भी मारा गया | इस को लेकर सवाल खड़े किये जा रहे है की क्या वह डॉक्टर घटना के समय मौजूद थे ? बिना वंहा मौजूद रहे कैसे दावा कर रहे थे की वह मारते देखा है | इसके लिए इन डॉक्टरो की भी जाँच करने की मांग पुलिस आयुक्त से पत्रकार संघटनो द्वारा किया गया है |

कोट ….

रात के समय घटी इस घटना की जानकारी मुझे सुबह हुआ | इस की जांच किया जा रहा है | मामले में दोषी ड्राइवर के खिलाफ कार्यवाई किया जायेगा | इसके साथ ही उसके पास महाराष्ट्र पुलिस का पहचानपत्र कंहा से आया इसकी भी जाँच किया जा रहा है |

नंदकिशोर सस्ते ,पुलिस निरीक्षक ,वाशी जीआरपी

बीवीजी के इस ड्राइवर के इस तरह के हरकत को बरदास्त नही किया जायेगा | ड्राइवर की जांच कर कार्यवाई किया जायेगा |

रवी देशपांडे ,बीवीजी

रेलवे पर बीएमसी मेहरबान

Posted on


रेलवे पर बीएमसी मेहरबान

  • 250 करोड़ का पानी बिल बकाया

  • बीएमसी और रेलवे अधिकारियों की साठगांठ

  • दो वर्षों से रेलवे पर मनपा का पानी बिल बकाया

  • दोषी अधिकारियों से दंड की रकम वसूल करने की मांग

  • नागरिकों के पैसे रेलवे पर लुटाने पर उठे सवाल

मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई की पहचान सिर्फ ऊंची इमारतें, खूबसूरत समुद्री तट, नाइट लाइफ और मायानगरी ही नहीं हैं। मुंबई की एक पहचान यहां की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों से भी होती है। प्रति-दिन इन लोकल से करोड़ों की संख्या में यात्री सफर करते हैं। इन यात्रियों को मनपा की तरफ से कई सुविधाएं भी दी जाती हैं। इसके बावजदू रेलवे के ऊपर बीएमसी का ढाई सौ करोड़ रुपए पानी बिल बकाया है। बावजदू इसके मुंबई मनपा द्वारा आंख बंद कर रेलवे ब्रिज या फुट ओवर ब्रिज की मरम्मत के लिए हर साल करोड़ों रुपए लुटाए जाने का खुलासा आरटीआई के तहत समीर झवेरी द्वारा मांगी गई जानकारी से हुआ है।
अभी हाल ही में अंधेरी में रेलवे ब्रिज गिरने से कई लोगों की मौत हो गई थी, तो कई लोग जख्मी हो गए थे। इस घटना के बाद रेलवे और मनपा के बीच ब्रिज की मरम्मत को लेकर विवाद छिड़ गया। इसके साथ ही मुंबई लोकल के ऊपर से गुजरने वाले दर्जनों ब्रिज की मरम्मत को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। इसमें सवाल भी उठाए गए कि इन ब्रिजों की मरम्मत रेलवे करे, तो वहीं रेलवे ने इन ब्रिज का काम मनपा की तरफ ढकेल दिया था। इस बीच आरटीआई एक्टिविस्ट समीर झवेरी द्वारा मुंबई मनपा से मंगाई जानकारी में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए।
इसमें बताया गया है कि मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे के ऊपर पिछले कई वर्षों से ढाई सौ करोड़ रुपए पानी बिल बकाया है। इसके बावजूद मनपा प्रति वर्ष रेलवे के ऊपर करोड़ों रुपए लुटा रही है।
मनपा ने रेलवे को भेजे थे पत्र
मुंबई मनपा द्वारा दी गई जानकारी में बताया गया है कि मुंबई मनपा की तरफ से पश्चिम रेलवे और मध्य रेलवे को जलापूर्ति की जाती है। इसके बदले रेलवे द्वारा पैसा दिया जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मध्य और पश्चिम रेलवे ने पानी बिल नहीं भरा है।
इसमे मध्य रेलवे का 100 करोड़ 84 लाख 38 हजार 873 रुपए है। इसके अलावा प्रति महीना दो प्रतिशत लेट पेमेंट है। वहीं पश्चिम रेलवे पर 136 करोड़ 95 लाख 78 हजार रुपए पानी बिल बकाया है। इसके साथ ही 2 प्रतिशत लेट पेमेंट प्रति महीना अलग से है। यह बिल वसूल करने के लिए मनपा की तरफ से कई बार लेटर भी भेजे गए हैं। इसके बावजदू रेलवे की तरफ से इस पर कोई कदम नहीं उठाया गया।
मनपा ने रेलवे पर लुटाए करोड़ों रुपए
रेलवे पर ढाई सौ करोड़ पानी बिल बाकी होने के बावजदू मनपा रेलवे पर प्रति महीना करोड़ों रुपए लुटाए जा रही है। रेलवे में मुंबई मनपा द्वारा नागरिकों की सुविधा के लिए कई जगहों पर रेलवे ब्रिज बनाए गए हैं और कुछ जगहों पर बनाए जा रहे हैं। इसके लिए रेलवे मनपा से भी इन ब्रिजों के निर्माण के लिए पैसे लेती है। रेलवे द्वारा मांग किए जाने पर प्रति वर्ष मनपा की तरफ से लाखों रुपए दिए गए हैं। पैसा देने के बाद वापस देखा नहीं जाता कि काम हुआ भी है या नहीं। वहीं इसे लेकर नागरिकों द्वारा नाराजगी व्यक्त की जा रही है। उनका कहना है कि अगर रेलवे पर बीएमसी के ढाई सौ करोड़ रुपए बाकी हैं, तो उसी पैसे से ही रेलवे क्यों नहीं काम करती है? मनपा की तिजोरी से क्यों पैसे लुटाए जा रहे हैं?
मुंबई मनपा का रेलवे के ऊपर ढाई सौ करोड़ रुपए पानी बिल बाकी है। इसमें मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे दोनों का समावेश है। इसके बावजदू रेलवे द्वारा डिमांड किए जाने पर मुंबई मनपा प्रति वर्ष लाखों रुपऐ मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे को पब्लिक ब्रिज बनाने और मरम्मत करने के लिए दे रही है। अगर रेलवे को जरूरत है तो मुंबई मनपा के उनके ऊपर बकाए पैसे से ही काम करना चाहिए। इसके साथ ही रेलवे के जिन लापरवाह अधिकारियों के कारण यह पैसा नहीं भरा गया, उनके वेतन से यह पैसा वसूल करना चाहिए।
समीर झवेरी, रेलवे एक्टिविस्ट
मुंबई मनपा को हम टैक्स देते हैं, जिससे कि शहर का विकास हो सके। शहरभर में सड़क पर गड्ढों का अंबार है। इन सड़कों की मरम्मत तो नहीं हो पा रहा है, लेकिन रेलवे पर मेहरबान होकर उन पर पैसे लुटाए जा रहे हैं। रेलवे द्वारा पानी का बिल नहीं भरा गया है, तो उनके पानी कनेक्शन काट देनी चाहिए। मुंबई मनपा के अधिकारी रेलवे पर इतना क्यों मेहरबान हैं, इसकी अब सीबीआई जांच होनी चाहिए।
– एड दिलीप इनकर, सामाजिक कार्यकर्ता

महिला विशेष बालगृह से नाबालिग गायब

Posted on


महिला विशेष बालगृह से नाबालिग गायब

  • महिला बाल सुधारगृह सुरक्षा की खुली पोल

  • टूटी हुई सुरक्षा दीवार से कूदकर भागी लड़की

  • दो कर्मचारियों के भरोसे बालसुधार गृह की सुरक्षा

मुंबई। उत्तर प्रदेश और बिहार के शेल्टर होम में बच्चियों के साथ दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आने के बाद देशभर के शेल्टर होम की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि अब ठाणे जिले के उल्हासनगर स्थित महिला विशेष बालगृह से एक नाबालिग लड़की के गायब होने का मामला सामने आया है। इससे बाल सुधारगृह में सुरक्षा के दृष्टिकोण से विशेष व्यवस्था नहीं किए जाने का भी खुलासा हुआ है।
> बच्चों के साथ होने वाले अन्याय को रोकने और सुरक्षा की दृष्टिकोण से ठाणे जिला में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) कार्यरत है। इसके माध्यम से ही उल्हासनगर के गांधी रोड पर महिला विशेष बालगृह (सुधारगृह) बनाया गया है। इस बाल सुधार गृह में 10 अगस्त को सुबह 7 बजे के करीब वहां के 8 लड़कियों को प्रात:विधि के लिए उठाया गया। उसी दौरान 17 वर्षीय नाबालिग प्रात:विधि के लिए जाने के बाद बाल सुधारगृह के पीछे टूटी हुई दीवार से कूदकर भाग गई। बालसुधार गृह की महिला कर्मचारी जब दूध लेकर वापस आई तो देखी कि लड़की वहां से गायब है। इसके बाद चारों तरफ खोजबीन शुरू हुआ, लेकिन लड़की का कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद हिललाइन पुलिस स्टेशन में लड़की के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई गई है।

सुरक्षा के नाम पर खिलवाड़

उल्हासनगर-5 स्थित सुधारगृह की सुरक्षा के लिए एक महिला अधीक्षक सहित सात कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं, जो इस बाल सुधारगुह के बच्चों पर नजर रखते हैं। आठ- आठ घंटे की ड्यूटी इन कर्मचारियों को दी गई है। हर समय दो कर्मचारी तैनात रहते हैं। इतने बड़े बाल सुधार गृह में रहने वाली लड़कियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक समय में सिर्फ दो कर्मचारियों पर होती है। इसके साथ ही बाल सुधार गृह में किसी भी तरह का कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगाया गया है। यह बाल सुधारगृह में रहने वाली बच्चियों की सुरक्षा के साथ एक तरह से खिलवाड़ है। इस घटना के बाद बाल कल्याण समिति सहित पुलिस के बीच भी खलबली मची है कि उसे तलाश कर जल्दी लाया जाए।

संस्था द्वारा नाबालिग युवती का मेडिकल नहीं कराए जाने का संदेह

बाल सुधार गृह के कर्मचारी ने बताया कि इस बाल सुधारगृह में सिर्फ बलात्कार पीड़ित या अन्य मामले की लड़कियों को रखा जाता है। इसके बावजूद बुधवार को संतोष फाउंडेशन संस्था वालों ने इस लड़की को यहां लाया, उन्हें बताया गया कि लड़की को यहां नहीं रख सकते। इसके बावजूद जबरन उसे रखा। लड़की का मेडिकल करने के लिए कहा गया, लेकिन मेडिकल भी नहीं कराए। उनके साथ कोई पुलिस वाला भी नहीं आया था, न ही उस लड़की की शिकायत कहीं किए थे। इससे एक सवाल उठता है कि आखिरकार इस संस्था द्वारा लड़की की शिकायत और मेडिकल क्यों नहीं कराई गई।
हमारी संस्था स्टेशन पर बिछड़ने वाली महिलाओं के लिए कार्य करती है। बुधवार को कल्याण रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म-5 पर लड़की मिली थी। उस समय वह रो रही थी। उसने बताया था कि पांच घंटे से उसका प्रेमी उसे छोड़कर चला गया है। इसके बाद कल्याण जीआरपी में इसकी शिकायत कर उल्हासनगर के महिला विशेष बालगृह में रखे थे। उसके घरवालों का नंबर नहीं लग रहा है। फोन लगेगा तो उन्हें सूचना जरूर देंगे, लेकिन शिकायत नहीं करने और मेडिकल नहीं कराए जाने का आरोप गलत है।
– रंजना ठाकुर, इंचार्ज, संतोष फाउंडेशन
उल्हासनगर महिला विशेष बालगृह से 17 वर्षीय लड़की के गायब होने की शिकायत हमारे पास आई थी। बताया गया कि लड़की कल्याण स्टेशन पर मिली थी, उसे संस्था वालों ने इस बालगृह में रखा। उसके अनुसार शनिवार को शिकायत दर्ज किए हैं। लड़की उत्तर प्रदेश के खागाफतेहपुर के हाथगांव की रहने वाली है। वहां के स्थानीय पुलिस को भी सूचना दे दी गई है।
-जी. एस. पलांगे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक, हिललाइन पुलिस स्टेशन
संतोष फाउंडेशन संस्था के लोगों ने बुधवार रात को इसे लाया था। इसके बाद उसे यहां रखा गया। गुरुवार को उसे कोर्ट में पेशी के लिए ले जाने के बाद वापस लाए थे। लड़की काफी रो रही थी। अगले दिन शुक्रवार सुबह वह पीछे की दीवार से कूदकर भाग गई। इसकी शिकायत हमने की है।
– महिला कर्मचारी
उल्हासनगर महिला विशेष बालगृह

करोड़ों छात्रों का करियर दांव पर

Posted on


डीम्ड यूनिवर्सिटी /शिक्षा माफिया और सरकार की सांठगांठ

करोड़ों छात्रों का करियर दांव पर

  • > सुप्रीम कोर्ट के आदेश की उड़ी धज्जियां
  • > युजीसी के अधिकारियों के भी ‘अर्थ’पूर्ण संबंध
  • > छात्राओं को कर रहे गुमराह
मुंबई। देशभर की डीम्ड शैक्षणिक संस्थाओं को उनके नाम के आगे से यूनिवर्सिटी शब्द हटाने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यूजीसी द्वारा सर्कुलर भी निकाला गया है। इसके बावजूद देश और राज्य के शिक्षा माफिया और केंद्र सरकार के आर्थिक रूप से सांठगांठ कर सैकड़ों शिक्षण संस्थाएं यूनिवर्सिटी शब्द लिखकर लाखों छात्रों को धोखा दे रहे हैं। इसके साथ करोड़ों रुपए की काली कमाई कर रहे है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 123 शैक्षणिक संस्थानों को अपने नाम से ‘यूनिवर्सिटी’ शब्द हटाने का निर्देश नवंबर 2017 में दिया था । यूजीसी के सर्कुलर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट एक आदेश के आधार पर यह निर्देश दिया गया है, जिसमें ‘डीम्ड टु बी यूनिवर्सिटी’ (मानित विश्वविद्यालयों) संस्थानों द्वारा अपने नाम के साथ ‘यूनिवर्सिटी’ लिखने पर सवाल उठाया गया था।
यूजीसी और सरकार बरत रही लापरवाही
यूजीसी ने ‘डीम्ड टु बी यूनिवर्सिटी’ संस्थानों द्वारा अपने नाम के साथ ‘यूनिवर्सिटी’ शब्द के इस्तेमाल को यूजीसी अधिनियम-1956 की धारा-23 का उल्लंघन बताया है। यह उपबंध ‘यूनिवर्सिटी’ शब्द के इस्तेमाल की शर्तों से जुड़ा है। इसके साथ यूजीसी ने चेतावनी दी है कि जो संस्थान इस आदेश का पालन नहीं करेंगे, उन पर यूजीसी (इंस्टीट्यूशंस डीम्ड टु बी यूनिवर्सिटीज) रेगुलेशन-2016 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद यह सब संस्थाए सुप्रीम कोर्ट के आदेश और यूजीसी के निर्देश को ताक पर रख कानून की धज्जिया उड़ाते हुए यूनिवर्सिटी शब्द का इस्तेमाल धड्डले से कर रहे है। इसके बावजूद सरकार और यूजीसी इन संस्थाओं पर कार्रवाई करने के बजाय लापरवाही बरत रही है। इस संदर्भ में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर से सपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
> इनमें यूजीसी के निर्देश के बाद जिन प्रमुख संस्थानों के नाम से अब विश्वविद्यालय शब्द हट जाएगा, उनमें महाराष्ट्र के डॉ. डी वाय पाटिल संस्थान,भारतीय विद्यापीठ , सिंबायोसिस युनिवर्सिटी (पुणे) सहित दिल्ली स्थित इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (पूसा), इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ फॉरेन ट्रेड, इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट, जामिया हमदर्द आदि शामिल हैं।
> इनके अलावा इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ साइंस (बेंगलुरु), सिंबायोसिस युनिवर्सिटी (पुणे), बिट्स पिलानी, बीआईटी मेसरा (रांची), फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (देहरादून), गुरुकुल कागंड़ी विवि (हरिद्वार), गितम यूनिवर्सिटी (विशाखापट्टनम), मानव रचना इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (फरीदाबाद) जैसे सहित देश के 123 डीम्ड संस्थानों डीम्ड उच्च शिक्षण संस्थानों के नाम से ‘यूनिवर्सिटी’ शब्द हटाने का निर्देश दिया गया था। नवंबर 2017 के इस निर्देश में साफ-साफ कहा गया था की एक महीने के अंदर अपने नाम से ‘यूनिवर्सिटी’ शब्द हटाने को कहा है।
यूनिवर्सिटी के झांसे में पड़ रहे छात्र
इन संस्थाओं द्वारा अपने नाम के आगे यूनिवर्सिटी शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसके कारण छात्र इन डीम्ड यूनिवर्सिटी के झांसे में पड़ कर प्रवेश लेते है। जब तक उन्हें जानकारी होती है तब काफी लेट और पैसा लग गया होता है, जिसके कारण मजबूरन यहा से पढ़ाई करना पड़ता है। जिसका नतीजा आगे उन्हें पढ़ाई में झेलना पड़ता है।
-एड. दिलीप इनकर,
सामाजिक कार्यकर्ता
इन डीम्ड संस्थाओं के डायरेक्टर खुद को वाइस चांसलर बताते है सुप्रीम कोर्ट द्वारा देश भर के इन डीम्ड संस्थाओ से यूनिवर्सिटी शब्द हटाने का साफ निर्देश दिया गया है। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रख कर यूनिवर्सिटी शब्द का इस्तेमाल कर रहे है। इसमें यूजीसी, एमएचआरडी के अधिकारी सोये है। उन्हें नीद से जागकर इस तरह के संस्स्थाओं पर कार्रवाई करने की जरुरत है।
– करतार सिंह,
याचिकाकर्ता