Month: July 2018

होम्योपैथिक हॉस्पिटल के नाम पर सिडको से हड़पे भूखंड 

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होम्योपैथिक हॉस्पिटल के नाम पर सिडको से हड़पे भूखंड

हॉस्पिटल में चल रही कोचिंग क्लास, कैफे, फर्नीचर की दुकान

दबंग दुनिया : नागमणि पांडेय

मेडिकल से दवा नहीं लिए जाने पर भेजा अस्पताल खाली करने का नोटिस

भूखंड का आधा हिस्सा बिल्डर को बेचा

हाईकोर्ट में पहुंचा मामला

मुंबई। सिडको की मिली भगत से चैरिटी करने के लिए न्यू पनवेल और खारघर में होम्योपैथिक हॉस्पिटल के नाम पर भूखंड हासिल कर दूसरों को बेचने और कानून की धज्जियां उड़ाने का मामला सामने आया है। इस मामले का खुलासा खुद पैनेसिया हास्पिटल के संचालक सुभाष सिंह द्वारा करते हुए बताया है कि यह नंदकुमार गायकवाड़ नामक एक डाक्टर की करतूत है। गायकवाड ने एलसीईएच की अमान्य सर्टिफिकेट दिखाकर सिडको से 3 प्लॉट हासिल किया और फिर उनके जैसे दूसरे डाक्टरों के हाथ बेच दिया। इस मामले का खुलासा होने के बाद मुंबई हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किया गया है। जहां अब इसका फैसला होना है।

सूत्रों की माने तो पैनेसिया हॉस्पिटल नंदकुमार गायकवाड के जगह पर बना हुआ है। उस अस्पताल के निचे ही नंकुमार के रिश्तेदार का एक मेडिकल है। माना जा रहा है की इस मेडिकल से नंदकुमार के भी संबंध है। पिछले कई वर्षों से यह अस्पताल द्वारा इस मेडिकल से दवा लिया जाता था। लेकिन किसी कारणवश थोड़ा बहुत दवा लेना बंद कर दिया गया। इसकी भनक नंदकुमार को होने पर अस्पताल को खाली करने का नोटिस भेज दिया। लेकिन अचानक इस नोटिस आने के कारण डॉ सुभाष सिंह के पैरोतले जमीन खिसक गया। क्योंकि उन्होंने इस अस्पताल में करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए है। अब अचानक इसे खाली करने का नोटिस आने से भारी नुकसान जो होने वाला है।

अस्पताल खाली करने के नोटिस के बाद मामला आया सामने

ज्ञात हो कि यह मामला पैनेसिया हॉस्पिटल की जमीन को खाली करने की नोटिस के बाद आया है। बताया जा रहा है कि जिस भूखंड पर पैनेसिया हास्पिटल बना है वह जमीन दरअसल डॉ. नंदकुमार गायकवाड़ ने होम्योपैथिक क्लिनिक खोलने के लिए आवंटित करवाया था। लेकिन 2010 तक कोई निर्माण नहीं करने से भूखंड आवंटन रद्द होने वाला था जिसे बचाने गायकवाड़ ने 15 सालों के कान्ट्रैक्ट पर इसे डॉ. सिंह को सौंप दिया, जहां पैनिसिया हॉस्पिटल चलता है। डॉ. सिंह का आरोप है कि गायकवाड़ ने उनके साथ धोखाधड़ी की है। अपात्र होकर भी गायकवाड़ ने पनवेल में 2 और खारघर में 1 भूखंड हासिल किया है। खारघर सेक्टर 2 के प्लाट नंबर 15 पर स्थित एक भूखंड आज भी अधूरा पड़ा है। कहने के लिए यहां हॉस्पिटल चलता है, लेकिन हकीकत में यहां फर्नीचर की दुकान, कोचिंग क्लास और कैफे चलता है, जो धांधली का बड़ा सबूत है।

राजनेताओं के दबाव में छिड़ा विवाद

सूत्रों की माने तो विधानसभा चुनाव के दौरान पनवेल मनपा चुनाव में उत्तर भारतीयों को उम्मीदवारी देने का वादा एक राजकीय दल द्वारा किया गया था। लेकिन पनवेल मनपा चुनाव की घोषणा के बाद उम्मीदवार के नाम की घोषणा किये जाने के बाद एक भी उत्तर भारतीयों के नाम शामिल नहीं थे। इससे नाराज होकर भाजपा के दर्जनों उत्तर भारतीय नेता नाराज होकर पनवेल में एक मीटिंग की।

इस मीटिंग में डॉ सुभाष सिंह भी उपस्थित थे। इस मीटिंग के दौरान भाजपा से बागायत की आवाज उठाया गया। इस को लेकर पनवेल के इन नेताओं में काफी रोष उमड़ा। जिसके बाद इन नाराज लोगों को किसी तरह शांत किया गया। लेकिन चुनाव समाप्त होते ही राजकीय दबाव में डॉ सुभाष सिंह के खिलाफ यह चाल चला गया और उन्हें अस्पताल को खाली करने का नोटिस भेजा गया। लेकिन यह नोटिस भेजने वाले के खिलाफ जबब जांच किया गया।

उसके बाद यह भूखंड फर्जी जानकारी देकर हड़पे जाने का खुलासा हुआ। वहीं किसी भी तरह के राजकीय षड्यंत्र होने से सुभाष सिंह ने साफ इंकार कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में विधानसभा सत्र के दौरान तारांकित सवाल भी पूछे गए है। जिसमे सिडको द्वारा इसके खिलाफ जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

यह बड़ी धोखाधड़ी है और नियमों का उल्लंघन है, जिसके खिलाफ उन्होंने सिडको और पनवेल पुलिस को शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में अवैध तरीके से रिजर्व प्लाट हथियाने और कानून के साथ धोखाधड़ी किया गया है। हमें इस की जानकारी भी नही थी। उन्होंने बताया की इस मामले में कोर्ट में याचिका भी दाखिल किये है जल्द उसका भी निर्णय आएगा। और हमें विश्वास है की हमें न्याय मिलेगा।

– डॉ. सुभाष सिंह , शिकायतकर्ता

डॉ.सिंह की लिखित शिकायत मिली है। उसकी जांच के लिए मिले निर्देश पर मुझे संबंधित हास्पिटल की फाइल का आकलन कर रहा हूं। जल्द ही गायकवाड़ को शोकाज नोटिस भेजी जाएगी। जवाब आने पर जरूरत पड़ी तो जांच के लिए कमेटी बनाई जाएगी।

– टी एल परब , मैनेजर

सिडको

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मराठा मोर्चा के नाम पर हिंसा फैलाने की साजिश

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मराठा मोर्चा के नाम पर हिंसा फैलाने की साजिश

‘दम बिरयानी’ खाकर फैलाई हिंसा

मानखुर्द, गोवंडी से उपद्रवियों का आयात

दबंग दुनिया : नागमणि पांडेय

कुछ बताने से कतरा रही पुलिस

आंदोलन भड़काने के लिए शिवसैनिकों पर निशाना

पुलिस अधिकारी-कर्मचारी हुए घायल

दर्जनों वाहनों को किया आग के हवाले

मुंबई। देशभर में आदर्श मोर्चा के रूप में मराठा मोर्चा की पहचान हो गई थी। इस मोर्चा को बदनाम करने के लिए बिरयानी और पैसों का लालच देकर नौजवानों को मोर्चा में शामिल कर हिंसा कराया जा रहा है। इसके कारण अब मराठा मोर्चा ‘मुख मोर्चा’ के बजाय ‘ठोक मोर्चा’ बन गया है ।
मराठा आरक्षण के लिए 27 वर्षीय काकासाहेब शिंदे ने सोमवार को जल समाधि ले ली थी। इसके बाद मंगलवार और बुधवार को मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े संगठनों ने महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया था। शिंदे की मौत के बाद महाराष्ट्र के कई हिस्सों में नए सिरे से प्रदर्शन शुरू हो गया है। विपक्ष के नेताओं ने भाजपानीत राज्य सरकार पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश की है। परभणी जिले के गंगाखेद तहसील में प्रदर्शनकारियों ने अहमदनगर-औरंगाबाद राजमार्ग जाम कर दिया था। पुलिस वाहन एवं बस समेत कई वाहनों को काफी नुकसान भी पहुंचाया।

पुलिस चौकी में तोड़फोड़

राज्यभर में भड़कते हिंसा को देख मराठा मोर्चा द्वारा शाम को मीटिंग बुलाकर मोर्चा वापस ले लिया गया। इसके बाद राज्यभर में आंदोलन समाप्त होने की घोषणा कर दी गई। राज्यभर में शांति का माहौल बना ही था कि कोपखैरणे में कुछ उपद्रवियों ने अचानक शाम 7 बजे के करीब धावा बोल दिया। ग्रुप में आए 18 से 22 उम्र के सैकड़ों युवकों ने सबसे पहले कोपरखैरणे डी-मार्ट के पास पुलिस चौकी में तोड़-फोड़ किया। इसके बाद चौकी के बाहर दोपहिया वाहनों को जला दिया। इसके बाद सड़क पर खड़ी दो कारों को भी आग के हवाले कर दिया।

मराठा और गांववालों के बीच हिंसा फैलाने का षड्यंत्र

डी-मार्ट के पास पुलिस चौकी में तोड़-फोड़ करने और वाहनों में आग लगाने के बाद उपद्रवी युवक कोपरखैरणे के तीन टांकी की तरफ दौड़े। इस बीच रास्ते में जितने भी वाहन खड़े मिले, उन वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। दुकानों में तोड़-फोड़ किया गया। इसके बाद कोपरखैरणे तीन टांकी के पास शिवसेना नगरसेवक शिवराम पाटिल के तीन मंजिला कार्यालय में तोड़-फोड़ की गई। बिल्डिंग में प्रवेश कर शिवराम पाटिल के सभी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। कोपरखैरणे गांव में घुसकर कई घरों पर पत्थराव किया गया। गांव के युवक भी कुछ समय के लिए आक्रोशित हुए, लेकिन शिवराम पाटिल ने उन युवकों को समझाकर हिंसा करने से रोका।

पुलिस ने छोड़े आंसू गैसDD_27_MU_01F (3).jpg

अचानक उत्पन हुए इस हिंसा की जानकारी कोपरखैरणे पुलिस को होने पर तुरंत आस-पास के पुलिस स्टेशनों को सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस फोर्स की मदद से आंसू गैस का इस्तेमाल कर कुछ उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया। बचे उपद्रवी भागने में सफल रहे।

सीसीटीवी फुटेज से होगा उपद्रवियों की पहचान

कोपरखैरणे सहित नवी मुंबई में हुए हिंसक आंदोलन के बाद पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुट गई है। इस फुटेज के आधार पर मराठा मोर्चा में शामिल हुए उपद्रवियों की पहचान पुलिस करने में लगी है। उपद्रवियों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी पुलिस ने कर ली है।

पैसा और बिरयानी खाकर किए पत्थराव

सूत्रों की मानें तो कोपरखैरणे गांव में पथराव करते समय कुछ उपद्रवियों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया। स्थानीय लोगों द्वारा जब पकड़ा गया, तब इन उपद्रवियों ने बताया कि वे नवी मुंबई के बाहर से आए हैं। उन्हें बिरयानी खिलाकर पैसा दिया गया। उसके बाद पत्थर लेकर आए थे। उन्हें तोड़-फोड़ करने को कहा गया था। फिलहाल इस बारे में कोपरखैरणे पुलिस कुछ भी बोलने से कतरा रही है।

मानखुर्द, गोवंडी से आए उपद्रवी
सूत्रों की मानें तो मराठा मोर्चा की समाप्ति की घोषणा करने के बाद इसे हिंसक रूप देने का षड्यंत्र रचा गया। उसके अनुसार कुछ लोगों द्वारा मानखुर्द और गोवंडी से युवकों को बिरयानी खिलाकर और पैसे देकर हिंसा करने के लिए भेजा गया। कोपरखैरणे में शाम के समय हिंसा करने वाले युवक 18 से 22 वर्ष की उम्र के थे। आखिरकार इन्हें हिंसा के लिए उकसाने वाले कौन थे? इसकी जांच होनी चाहिए।

कोपरखैरणे या नवी मुंबई के अन्य भागो में हिंसा करने वालों का मराठा मोर्चा से कोई संबंध नहीं है। मराठा मोर्चा में कुछ बाहरी लोगों का प्रवेश कर इसे बदनाम करने की साजिश है। इस पर पुलिसिया कार्रवाई करने की जरूरत है।
-नरेंद्र पाटिल विधायक, माथाडी नेता

मराठा आरक्षण का मुद्दा कोर्ट के पास है। वहीं इस मामले में फैसला करेगा। सरकार की पूरा कोशिश है कि आरक्षण मिले। उसके अनुसार ही कार्य किया जा रहा है। इस आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे मराठा मोर्चा में कुछ बाहरी लोग घुसकर आंदोलन को हिंसक रूप दे रह हैं। इसके लिए मराठा मोर्चा के लोगों को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
-चंद्रकांत पाटिल

राजस्व मंत्री, महाराष्ट्र

23 स्टेशनों पर मेडिकल रूम के लिए टेंडर

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23 स्टेशनों पर मेडिकल रूम के लिए टेंडर

  • एमबीबीएस सहित अन्य डॉक्टर भी होंगे शामिल,


  • डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से जल्द होगा उपचार

    डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से जल्द होगा उपचार

👉 नागमणि पाण्डेय 👈👇
मुंबई। रेलवे यात्रियों को दुर्घटना के समय या फिर आपातकाल में अच्छी और सस्ती मेडिकल सुविधा मिले इसके लिए मध्य रेलवे ने 23 रेलवे स्टेशनों पर इमरजेंसी मेडिकल रूम के लिए टेंडर जारी किया है। विशेष कि अब रेलवे ने इमरजेंसी मेडिकल रूम के लिए एमबीबीएस डॉक्टरों के साथ-साथ बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस डॉक्टरों का भी समावेश किया है।
दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है यात्रियों की संख्या
मुंबई की जीवन रेखा मानी जाने वाली मुंबई लोकल ट्रेनों से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या दिन-प्रति दिन बढ़ रही है। इसके साथ ही इन ट्रेनों में बढ़ती भीड़ के कारण दुर्घटनाओं में भी बढ़ोतरी हो रहा है। इन दुर्घटनाओं में जख्मी होने वाले यात्रियों को समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण मौत हो जाती है। इसको लेकर मुंबई उच्च न्यायालय में सामाजिक कार्यकर्ता समीर झवेरी द्वारा याचिका दायर की गई थी। उसके बाद न्यायालय ने रेलवे को इमरजेंसी मेडिकल रूम बनाने का आदेश दिया था।
  • दादर स्टेशन पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बनाया गया इमरजेंसी रूम

इस आदेश के बाढ़ मध्य रेलवे द्वारा सबसे पहले दादर रेलवे स्टेशन पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इमरजेंसी रूम बनाया गया। इसके बाद इस का विस्तार करते हुए 12 स्टेशनों पर शुरू किया गया था। इन 12 स्टेशनों पर वन रूपी क्लिनिक द्वारा सेवा प्रदान किया जा रहा था। लेकिन रात के समय वन रूपी क्लिनिक द्वारा एमबीबीएस डॉक्टर नहीं होने के कारण उस पर कार्रवाई करते हुए वन रूपी क्लिनिक बंद कर दिया गया। इसके बाद इस में सुधार करते हुए 23 रेलवे स्टेशनों पर इमरजेंसी मेडिकल रूम का टेंडर निकाला गया है। इन स्टेशनों में तिलक नगर, कसारा, दिवा, वडाला रोड, वाशी, गोवंडी, मुलुंड, घाटकोपर, कुर्ला, कल्याण, डोंबिवली, मुंब्रा,भायखला, दादर, कर्जत, पनवेल, सायन, विक्रोली, कलवा, अंबरनाथ,भांडुप, उल्हासनगर, चेंबूर का समावेश है।

बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस डॉक्टरों का भी समवेश

इमरजेंसी मेडिकल रूम में जख्मी यात्रियों को उपचार करने हेतु सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टरों को प्रैक्टिस करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन अब मध्य रेलवे ने इसके लिए एमबीबीएस डॉक्टरों के साथ-साथ बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस डॉक्टरों का भी समावेश किया है। इसके लिए सिर्फ इन डॉक्टरों को इमरजेंसी मेडिकल उपचार का कोर्स किया होना चाहिए। यह कोर्स लगभग एक महीने का होता है। उसके बाद वह प्रैक्टिस कर सकते हैं।

  • मध्य रेलवे द्वारा इमरजेंसी मेडिकल रूम के लिए टेंडर निकाला गया है। इसकी जानकारी वेबसाइट पर भी अपलोड की गई है। पहले सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टर ही भाग ले सकते थे, लेकिन अब बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस डॉक्टर भी भाग ले सकते हैं। डिपोजिट भी कम कर दिया गया है।
– डॉ. ए. के. सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, मध्य रेलवे

  • हाईकोर्ट के आदेश पर रेलवे द्वारा जख्मी यात्रियों को उपचार देने की शुरुआत किया गया था। पहले सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टर ही भाग ले सकते थे, लेकिन मध्य रेलवे द्वारा एक बहुत ही सराहनीय कदम उठाते हुए बाकी के भी डॉक्टरों का भी समावेश किया है। इससे अब यात्रियों के उपचार के लिए डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ेगी और समय पर उपचार मिलने में मददगार साबित होगा।

    – समीर झवेरी, रेलवे एक्टिविस्ट

  • बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस डॉक्टर भी जख्मी यात्रियों का उपचार कर सकते हैं। उसके लिए यह डिग्री वाले डॉक्टर इमरजेंसी मेडिकल उपचार का कोर्स करते हैं। उसके बाद उसका बकायदा ट्रेनिंग लेते है। इसकी सूचना मै ने रेलवे की मीटिंग में दिया था। इसे रेलवे ने गंभीरता से लिया है और बाकी के डॉक्टरो को भी शामिल किया है यह बहुत ही सही है। इस से डॉक्टरो की संख्या बढ़ने के साथ साथ उपचार भी होगा।
    – डॉ. आकांक्षा त्रिपाठी, बीएएमएस डॉक्टर

23 स्टेशनों पर मेडिकल रूम के लिए टेंडर

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23 स्टेशनों पर मेडिकल रूम के लिए टेंडर

एमबीबीएस सहित अन्य डॉक्टर भी होंगे शामिल, डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से जल्द होगा उपचार

नागमणि पाण्डेय

मुंबई। रेलवे यात्रियों को दुर्घटना के समय या फिर आपातकाल में अच्छी और सस्ती मेडिकल सुविधा मिले इसके लिए मध्य रेलवे ने 23 रेलवे स्टेशनों पर इमरजेंसी मेडिकल रूम के लिए टेंडर जारी किया है। विशेष कि अब रेलवे ने इमरजेंसी मेडिकल रूम के लिए एमबीबीएस डॉक्टरों के साथ-साथ बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस डॉक्टरों का भी समावेश किया है।
दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है यात्रियों की संख्या
मुंबई की जीवन रेखा मानी जाने वाली मुंबई लोकल ट्रेनों से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या दिन-प्रति दिन बढ़ रही है। इसके साथ ही इन ट्रेनों में बढ़ती भीड़ के कारण दुर्घटनाओं में भी बढ़ोतरी हो रहा है। इन दुर्घटनाओं में जख्मी होने वाले यात्रियों को समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण मौत हो जाती है। इसको लेकर मुंबई उच्च न्यायालय में सामाजिक कार्यकर्ता समीर झवेरी द्वारा याचिका दायर की गई थी। उसके बाद न्यायालय ने रेलवे को इमरजेंसी मेडिकल रूम बनाने का आदेश दिया था।

दादर स्टेशन पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बनाया गया इमरजेंसी रूम

इस आदेश के बाढ़ मध्य रेलवे द्वारा सबसे पहले दादर रेलवे स्टेशन पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इमरजेंसी रूम बनाया गया। इसके बाद इस का विस्तार करते हुए 12 स्टेशनों पर शुरू किया गया था। इन 12 स्टेशनों पर वन रूपी क्लिनिक द्वारा सेवा प्रदान किया जा रहा था। लेकिन रात के समय वन रूपी क्लिनिक द्वारा एमबीबीएस डॉक्टर नहीं होने के कारण उस पर कार्रवाई करते हुए वन रूपी क्लिनिक बंद कर दिया गया। इसके बाद इस में सुधार करते हुए 23 रेलवे स्टेशनों पर इमरजेंसी मेडिकल रूम का टेंडर निकाला गया है। इन स्टेशनों में तिलक नगर, कसारा, दिवा, वडाला रोड, वाशी, गोवंडी, मुलुंड, घाटकोपर, कुर्ला, कल्याण, डोंबिवली, मुंब्रा,भायखला, दादर, कर्जत, पनवेल, सायन, विक्रोली, कलवा, अंबरनाथ,भांडुप, उल्हासनगर, चेंबूर का समावेश है।
बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस डॉक्टरों का भी समवेश : इमरजेंसी मेडिकल रूम में जख्मी यात्रियों को उपचार करने हेतु सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टरों को प्रैक्टिस करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन अब मध्य रेलवे ने इसके लिए एमबीबीएस डॉक्टरों के साथ-साथ बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस डॉक्टरों का भी समावेश किया है। इसके लिए सिर्फ इन डॉक्टरों को इमरजेंसी मेडिकल उपचार का कोर्स किया होना चाहिए। यह कोर्स लगभग एक महीने का होता है। उसके बाद वह प्रैक्टिस कर सकते हैं।

इमरजेंसी मेडिकल रूम के लिए नही देना होगा किराया

रेलवे स्टेशनों पर इमरजेंसी मेडिकल रूम रेलवे द्वारा बनाकर दिया जाएगा। इसके लिए कोई किराया रेलवे को नहीं देना होगा। रेलवे पहले इस जगह के लिए एक लाख रुपए डिपोजिट लेती थी। लेकिन अब इस में कमी करते हुए रेलवे सिर्फ 25 हजार रुपये डिपोजिट लेगी। उसके बाद डॉक्टर जख्मी यात्रियों को मुफ्त उपचार करने के साथ-साथ वह अपना मेडिकल शुरू कर सकते हैं।

मध्य रेलवे द्वारा इमरजेंसी मेडिकल रूम के लिए टेंडर निकाला गया है। इसकी जानकारी वेबसाइट पर भी अपलोड की गई है। पहले सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टर ही भाग ले सकते थे, लेकिन अब बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस डॉक्टर भी भाग ले सकते हैं। डिपोजिट भी कम कर दिया गया है।
– डॉ. ए. के. सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, मध्य रेलवे
हाईकोर्ट के आदेश पर रेलवे द्वारा जख्मी यात्रियों को उपचार देने की शुरुआत किया गया था। पहले सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टर ही भाग ले सकते थे, लेकिन मध्य रेलवे द्वारा एक बहुत ही सराहनीय कदम उठाते हुए बाकी के भी डॉक्टरों का भी समावेश किया है। इससे अब यात्रियों के उपचार के लिए डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ेगी और समय पर उपचार मिलने में मददगार साबित होगा।
– समीर झवेरी, रेलवे एक्टिविस्ट
बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस डॉक्टर भी जख्मी यात्रियों का उपचार कर सकते हैं। उसके लिए यह डिग्री वाले डॉक्टर इमरजेंसी मेडिकल उपचार का कोर्स करते हैं। उसके बाद उसका बकायदा ट्रेनिंग लेते है। इसकी सूचना मै ने रेलवे की मीटिंग में दिया था। इसे रेलवे ने गंभीरता से लिया है और बाकी के डॉक्टरो को भी शामिल किया है यह बहुत ही सही है। इस से डॉक्टरो की संख्या बढ़ने के साथ साथ उपचार भी होगा।
– डॉ. आकांक्षा त्रिपाठी, बीएएमएस डॉक्टर