Month: June 2018

निरहुआ की गुंडागर्दी 👉पत्रकार के टुकड़े करने की धमकी

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भाजपा सांसद के पिए ने टेंडर के लिए रेलवे अधिकारियों पर डाला दबाव

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page 1 pandeyji story.jpgभाजपा सांसद के पीए ने टेंडर के लिए रेलवे अधिकारियों पर डाला दबाव
को-आॅपरेटिव बैंक का डीडी बताकर टेंडर किया रद्द

टेंडर की जांच करने की मांग

दबंग दुनिया : नागमणि पांडेय

मुंबई। रेलवे द्वारा सभी रेलवे स्टेशनों पर जख्मी यात्रियों को इमरजेंसी उपचार के लिए जीवन रक्षक दवाइयां, चिकित्सा उपकरण और उपचार मुहैया कराएगी। इसके लिए पश्चिम रेलवे द्वारा हाल ही में रेलवे स्टेशनों पर इमरजेंसी मेडिकल रूम के लिए निविदा (टेंडर ) मंगाया गया था। इसके बाद कई लोगों द्वारा टेंडर भरा गया था, लेकिन इस टेंडर में भाजपा सांसद किरीट सोमैया के पीए के रूप में पहचाने जाने वाले जितेश मटालिया द्वारा रेलवे के अधिकारियों पर राजकीय दबाव डाला गया। इसके बाद रेलवे द्वारा ‘वन रूपी क्लीनिक’ का डीडी को-आॅपरेटिव बैंक का बताकर रद्द कर दिया गया और चार स्टेशनों का टेंडर मानव कल्याण ट्रस्ट अस्पताल को दे दिया गया।

दिन प्रति दिन रेलवे से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ साथ दुर्घटना होने के बाद मरने वालो की संख्या भी तेजी के साथ बढ़ रहा है । इसमें अधिकतर यात्रियों को समय पर उपचार नही मिलने के कारण मौत हो जाता है । इसको देखते हुए मुंबई हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किया गया था । जिसके बाद न्यायलय ने रेलवे को इस मामले में गंभीरता लेते हुए इमरजेंसी मेडिकल रूम चालु करने का निर्देश दिया था । जिसके बाद पहले दादर रेलवे स्टेशन पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मेडिकल रूम चालु किया गया । इसके बाद इस का विस्तार करते हुए मध्य रेलवे और वेस्टर रेलवे में सुरु किया गया । वर्तमान में मध्य रेलवे में वन रूपी क्लिनिक के माध्यम से रेलवे स्टेशनों पर इमरजेंसी मेडिकल रूम चालु किया गया । जिसके माध्यम से उपचार किया जाता है । इसी के तर्ज पर पश्चिम रेलवे ने भी इमरजेंसी मेडिकल रूम के लिए टेंडर मंगाया था ।

‘वन रूपी क्लिनिक’ का टेंडर किया रद्द

पश्चिम रेलवे द्वारा मंगाए गए टेंडर के बाद मध्य रेलवे में इमरजेंसी मेडिकल रूम की सेवा दे रही ‘वन रूपी क्लिनिक’ द्वारा भी टेंडर भरा गया था। सूत्रों की मानें तो ‘वन रूपी क्लिनिक’ ने कुल 10 रेलवे स्टेशनों के लिए टेंडर भरा था। इसके साथ ही मानव कल्याण ट्रस्ट हॉस्पिटल ने भी टेंडर भरा था। इसके लिए बकायदा लगभग 40 हजार के डीडी भी ‘वन रूपी क्लिनिक’ द्वारा जमा किया गया था।
यह डीडी को-आॅपरेटिव बैंक का था। रेलवे की तरफ से इस डीडी को गलत बताया गया। इस डीडी को को-आॅपरेटिव बैंक का बताकर टेंडर रद्द कर दिया गया। इस टेंडर को रद्द करने के बाद विरार, वसई, नालासोपारा, भायंदर रेलवे स्टेशन पर ‘इमरजेंसी मेडिकल रूम’ का टेंडर मंजूर किया गया है।

प्री मीटिंग में उपस्थित हुए किरीट सोमैया के पीए जितेश मटालिया

पश्चिम रेलवे के तरफ से जब ‘इमरजेंसी मेडिकल रूम’ के लिए टेंडर मंगाए गए थे। उसके बाद अलग-अलग संस्थाओं द्वारा टेंडर भरा गया। इस बीच 23 अप्रैल को दोपहर 3 बजे भाजपा सांसद किरीट सोमैया के पीए जितेश मटालिया मानव कल्याण ट्रस्ट हॉस्पिटल के लोगों के साथ चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेट के पास पहुंचे। सूत्रों की मानें तो वहां लगभग कई घंटे इसको लेकर चर्चा की गई। बताया जा रहा है कि इस दौरान जितेश ने किरीट सोमैया के पीए होने और रुतबे का इस्तेमाल करते हुए मानव कल्याण ट्रस्ट हॉस्पिटल को किसी भी हालत में टेंडर देने के लिए दबाव डालते नजर आए। सूत्रों की मानें तो इनडाइरेक्ट जितेश का मानव कल्याण ट्रस्ट हॉस्पिटल से संबंध है। इसीलिए इसे टेंडर दिलाने में जोर देते नजर आए।

प्री मीटिंग के बाद रद्द हुआ डीडी

सूत्रों की मानें तो जितेश मटालिया ने रेलवे के चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेट सहित कई अधिकारियों से मुलाकात किया। उसके बाद कुछ दिन बाद ही ‘वन रूपी क्लिनिक’ द्वारा 10 स्टेशनों पर ‘इमरजेंसी मेडिकल रूम’ के लिए भरा गया डीडी को-आॅपरेटिव बैंक का बताकर रद्द कर दिया गया। इसके बाद यह टेंडर मानव कल्याण ट्रस्ट हॉस्पिटल को चार स्टेशनों पर ‘इमरजेंसी मेडिकल रूम’ शुरू करने की अनुमति दी गई। फिलहाल इन रेलवे स्टेशनों पर ‘इमरजेंसी मेडिकल रूम’ बनाने का कार्य शुरूकिया जाने वाला है। ‘इमरजेंसी मेडिकल रूम’बनाने के बाद इसे मानव कल्याण ट्रस्ट हॉस्पिटल को सौंप दिया जाएगा।

रेलवे किसी के दबाव में आकर काम नहीं करती है। मैं सिर्फ जानकारी लेने के लिए वहां गया था। जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।
-जितेश मटालिया, पीए, किरीट सोमैया

हमने अखबार में टेंडर का विज्ञापन आने के बाद भरा था। मानव कल्याण ट्रस्ट हॉस्पिटल सामाजिक कार्य करते आ रही है। उसके अनुसार हमें चार स्टेशनों का टेंडर मिला है। रेलवे द्वारा यह मेडिकल रूम बनाकर दिए जाने के बाद कार्य शूुरू किया जाएगा। इसमें जितेश मटालिया का कोई संबंध नहीं है। हम नहीं जानते।
– डॉ. सुनील सिंह, मानव सेवा ट्रस्ट हॉस्पिटल

मध्य रेलवे के इमरजेंसी मेडिकल रूम के लिए काम कर रहा हु । मध्य रेलवे में यही कोपरेटिव बैंक का डीडी जमा किया था । उसे स्वीकार किया गया । लेकिन पश्चिम रेलवे द्वारा इसी गलत बताते हुए रद्द कर दिया है । शायद हो सकता है की कुछ राजकीय दबाव डाला गया है । लेकिन पूरा जानकारी नही की आखिर कार क्यों इस तरह से डीडी को गलत बताकर रद्द किया गया ।
-डॉ राहुल घुले ,सीइओ ,वन रूपी क्लिनिक

रातोंरात 6 वन रूपी क्लिनिक बंद करने का फरमान

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रातोंरात 6 वन रूपी क्लिनिक बंद करने का फरमान

स्टेशन मास्टर को प्राथमिक उपचार करने का निर्देश

क्लिनिक के संचालक आज से करेंगे आमरण उपोषण

दबंग दुनिया : नागमणि पाण्डेय
मुंबई। रेलवे यात्रियों को दुर्घटना के समय या फिर आपातकाल में अच्छी और सस्ती मेडिकल सुविधा मिले इसके लिए वन रूपी क्लिनिक सेवा लगभग एक वर्ष पहले शुरू की गयी थी। अब तक वन रूपी क्लिनिक की तरफ से अनेक मरीजों को उचित और अच्छी मेडिकल सुविधा मिल चुकी है, लेकिन अब राजकीय दबाव में मध्य रेलवे द्वारा बिना कोई पूर्व सूचना दिए रातोंरात 6 स्टेशनों की सेवा बंद करने का आदेश दिया है। इसके साथ हि स्टेशन मास्टर को इमरजेंसी में जख्मी लोगों को फर्स्ट उपचार करने का निर्देश दिया गया है। इस को लेकर शुक्रवार से वन रूपी क्लिनिक के संचालक ने आमरण उपोषण करने का निर्णय लिया है।

रेलवे में जख्मी यात्रियों को प्राथमिक उपचार के लिए शुरू हुई थी सेवा

मुंबई लोकल यहा के लोगों के लिए लाइफ लाइन के रूप में पहचाना जाता है। दिन पर दिन लोकल में यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ ही लोकल से गिरकर मरने वाले और जख्मी होने वालो की संख्या भी तेजी के साथ बढ़ रहा है। इस में अधिकतर यात्रियों की मौत समय पर उपचार नही होने के कारन होता है। इस को देखते हुए वन रूपी क्लिनिक द्वारा यात्रियों को उपचार नाम मात्र पर देने देने के लिए सर्विस शुरू किया। अब तक हजारों यात्रियों को जख्मी होने के बाद तुरंत प्राथमिक उपचार देकर नजदीक के अस्पताल में पहुंचाया जा चुका है। इस सेवा को देखते हुए यात्रियों द्वारा मध्य और हार्बर रेलवे के अन्य रेलवे स्टेशनों पर भी इस सेवा को शुरू करने की मांग की जा रही है। जिससे जख्मी होने वाले यात्रियों की जान बचाई जा सके, लेकिन अब रेलवे ने 12 क्लिनिक में से 6 क्लिनिक बंद करने का आदेश दिया है।

उच्च न्यायालय के आदेश पर शुरू हुआ क्लिनिक

लोकल से गिरकर जख्मी होने वाले यात्रियों को समय पर उपचार नही मिलने के कारण मौत हो जाता है। इस को देखते हुए मुंबई उच्च न्यायलय में याचिका दायर किया गया था। जिसके बाद न्यायलय ने रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को प्राथमिक उपचार मिल सके इसके लिए क्लिनिक सुरु करने का आदेश दिया था। जिसके बाद वन रूपी क्लिनिक ने इस में रूचि दिखाते हुए नाम मात्र दर पर उपचार देने की हामी भरी थी। इसके बाद रेलवे से मंजूरी लेने के बाद इस की सुरु वात किया गया।

क्लीनिक के लिए रेलवे को एक लाख का डिपोजिट

इस के लिए बकायदा वन रूपी क्लिनिक की तरफ से हर क्लिनिक के जगह के लिए एक लाख रुपये डिपोजिट रेलवे को दिया गया। लेकिन अब रेलवे द्वारा नियमो के अनुसार उपचार नही किये जाने का कारण देते हुए दंड स्वरूप एक लाख रुपये जप्त किये जाने का बताकर डिपोजिट का रक्कम वापस देने से इंकार किये जाने की जानकारी वन रूपी क्लिनिक के सीइओ डॉ राहुल घुले ने दिया। इस बारे में मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुनील उदासी से संपर्क किया गया। लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं मिला।

हमें यात्रियों को मुफ्त में उपचार दे रहे है। कुछ उपचार नाम मात्र पर कर रहे हैं। इसके बावजूद रेलवे राजकीय दबाव में षड्यंत्र के तहत बिना कोई सूचना दिए 12 क्लिनिक में से 6 क्लिनिक बंद करने का आदेश दिया गया है। रातोंरात कैसे सब समान हटाया जाएगा। इसके साथ ही न ही कोई कारण दिया गया है। इसके लिए शुक्रवार से ठाणे स्टेशन पर आमरण अनशन कर रहा हूं।

– डॉ. राहुल घुले, सीईओ, वन रूपी क्लिनिक

हाईकोर्ट के आदेश पर रेलवे द्वारा जख्मी यात्रियों को उपचार देने के लिए शुरू किया गया था। लेकिन अचानक 6 स्टेशनों की सेवा बंद करने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही स्टेशन मास्टर को प्राथमिक उपचार करने का निर्देश रेलवे द्वारा दिया गया। स्टेशन मास्टर क्या डॉक्टर है जो उपचार करेगा। यह रेलवे की बहुत बड़ी लापरवाही है। जो न्यायालय के आदेश को नजर अंदाज कर यह सेवा बंद कर रही है। – समीर झवेरी, रेलवे एक्टिविस्ट

बीवीजी उपचार के नाम पर लगा रहा सरकार को करोड़ों का चूना 

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बीवीजी उपचार के नाम पर लगा रहा सरकार को करोड़ों का चूना

डॉक्टर पर फर्जी कॉल का दबाव

दबंग दुनिया : नागमणि पांडेय

मुंबई। देशभर के रेलवे यात्रियों सहित महाराष्ट्र में 108 एंबुलेंस सेवा भारत विकास ग्रुप (बीवीजी) द्वारा पिछले कई वर्षों से दी जा रही है। अभी तक डॉक्टरों के टीडीएस और ड्राइवरों के पीएफ हड़पने वाली बीवीजी ने अब डॉक्टरों पर जबरन फर्जी कॉल (मरीज सेवा) करने का दबाव डाला गया है। इसके अनुसार प्रतिदिन एक डॉक्टर द्वारा 6 से 10 फर्जी कॉल की जा रही है। इसके लिए पिछले एक वर्ष में जिन मरीजों का जांच किया गया है उन मरीजों की डिटेल जांच की मांग की जा रही है।

108 मुफ्त एंबुलेंस योजना नेशनल हेल्थ मिशन के तहत महाराष्ट्र में इमरजेंसी मेडिकल सर्विस द्वारा लागू दुनिया की सबसे बड़ी स्कीम है। भारत विकास ग्रुप (बीवीजी) की ओर से लगभग 1 हजार एंबुलेंस जारी की गई हैं। यह एंबुलेंस आधुनिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस हैं। इन एंबुलेंसों पर 24 घंटे डॉक्टर और ड्राइवर तैनात रहते हैं। इसके माध्यम से आपातकाल के दौरान लोगों को मेडिकल सेवा दी जाती है। इसमें से अधिकतर एंबुलेंस रेलवे स्टेशनों पर खड़ी रहती हैं, जहां रेलवे यात्रियों को डॉक्टर मेडिकल सेवा देते हैं। जो भी व्यक्ति एंबुलेंस के पास आकर अपनी बीमारी बताता है, उसे वहां मौजूद डॉक्टर तुरंत उपचार कर दवा देते हैं। अगर मरीज की हालत ज्यादा खराब होती है, तो उसे नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, लेकिन अब आधी अधूरी जानकारी लिख कर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।

एक आईडी पर 4 से 5

फर्जी कॉल

> 108 एंबुलेंस सेवा पर मौजूद डॉक्टर को बीवीजी की तरफ से प्रतिदिन 5 से 10 फर्जी कॉल करने का दबाव डाला गया है। ऐसा लगभग एक वर्ष से किया जा रहा है। इसके अनुसार डॉक्टर एक आईडी पर एक दिन में 5 से 10 फर्जी कॉल करते हैं। डॉक्टरों के पास मौजदू एंट्री बुक में मरीज का नाम, पता और मोबाइल नंबर और क्या उपचार किया गया, यह लिखना आवश्यक होता है। बीवीजी के अधिकारियों के दबाव में डॉक्टर एक मोबाइल नंबर या एक लैंडलाइन नंबर दर्ज करने के बाद बाकी अन्य के नाम, पता और उपचार फर्जी लिख देता है। मोबाइल नंबर नहीं लिखा जाता है। इसमें सर्वाधिक फर्जी कार्य भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर होता है।

प्रति व्यक्ति बीवीजी को मिलता है 500 रुपए

> 108 एंबुलेंस सेवा प्रदान करने वाले बीवीजी के डॉक्टरों द्वारा रेलवे स्टेशनों के बाहर एंबुलेंस में उपचार या दवा देने के बदले 500 रुपए प्रति व्यक्ति दिया जाता है। उसके अनुसार एक हजार वाहनों में बीवीजी के 3500 डॉक्टर कार्यरत हैं।

> इन डॉक्टरों द्वारा प्रतिदिन 5 से 10 फर्जी कॉल करवा कर प्रतिदिन लगभग 10 से 20 लाख का फर्जीवाड़ा सरकार के साथ किए जाने का आरोप लगा है। इसके लिए इसकी जांच राज्य सरकार द्वारा करने के साथ ही सीबीआई द्वारा कराए जाने की मांग महाराष्ट्र राज्य एमईएमएस (108) डॉक्टर एसोसिएशन के समीर करबेले ने की है।

प्रति एंबुलेंस प्रति महीना ढाई लाख रुपए

इस सेवा के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रति एंबुलेंस महीना ढाई लाख रुपए दिए जाते हैं। इसके बावजूद डॉक्टरों से जबरन फर्जी कॉल करने का दबाव डाला जा रहा है। इन डॉक्टरों को महीने में लगभग 18 हजार रुपए और ड्राइवरों को 8 से 10 हजार रुपए वेतन के रूप में दिए जाते हैं। जबकि डॉक्टरों का वेतन 25 हजार से ऊपर होना चाहिए।

एक आईडी पर 5 से 7 नाम लिखे जाते हैं। उनका नाम, पता भी गलत होता है। आजकल हर व्यक्ति के पास मोबाइल है। इसके बावजूद उनका मोबाइल नंबर नहीं लिखा जाता। पूछे जाने पर बताते है कि इमरजेंसी में था, नंबर कैसे मांग सकते हैं। इसलिए इसकी जांच होनी चाहिए।

अतीक खान, उपाध्यक्ष

अगर कहीं कोई दुर्घटना होती है और वहां जितने भी लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। वह सब एक ही कॉल होता है। उसी तरह कई बार रेलवे स्टेशनों के पास मौजद एंबुलेंस पर यात्री एक साथ आते हैं। वह नाम, मोबाइल नंबर देने की हालत में नहीं रहते हैं। इसलिए उनके साथ जबरदस्ती नहीं की जा सकती है। इस तरह का कोई फर्जी कॉल नहीं किया जा रहा है। यह सब गलत आरोप है। अगर इस तरह कहीं है, तो बताएं।

– डॉ. अमोल पंडित, बीवीजी मुंबई विभाग इंचार्ज

प्लास्टिक बंदी के नाम पर स्वच्छता निरीक्षक कर रहे वसूली  

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नवी मुंबई : नवी मुंबई महानगर पालिका के स्वच्छता विभाग एवं सेनेटरी विभाग के कर्मचारी स्वच्छता अभियान को छोड़ वसूली अभियान शुरू कर दिया है। बुधवार को दोपहर कोपर खैरने सेक्टर 2 में मनपा की उपद्रव शोध पथक गाड़ी आई और उसमें से एक कर्मचारी उतरकर एक फेरीवाले के ठेले से जबरन आम की थैली लेकर वापस गाड़ी में बैठता है लेकिन उसे क्या पता कि मेरी यह हरकत किसी के कैमरे में कैद हो रही है । उक्त ब्यक्ति ने जब उस कर्मचारी के पास जाकर पूंछा कि आप मनपा के अधिकारी हैं तो वह भड़क गया, उसी दौरान वहां मौजूद एक पत्रकार भी पहुंच गया और उस अधिकारी से बात करने लगा तो आम की थैली एक गाड़ी के पिछे फेंककर भागने लगा, आखिरकार पत्रकार को शक हुआ तो गाड़ी को रोककर पुलिस को फोन किया । उसी बीच मनपा का एक अधिकारी आया और अपने उस कर्मचारी की गलतियों पर परदा डालते हुए उक्त पत्रकार को ही धमकी देने लगा कि सरकारी कामकाज में दखल डालने के मामले में तुम्हारे खिलाफ शिकायत दर्ज होगा, उसकी इस तरह की बयानबाजी से मामला तूल पकड़ लिया और यह मामला कोपर खैरने पुलिस स्टेशन में जा पहुंच लेकिन वहां पहुंचने के बाद जब विडियो देखा गया और वहां मौजूद पत्रकारों को देख उस अधिकारी की बोलती बंद हो गई । जिस तरह से मनपा कर्मचारी की गलती पर पर्दा डालते हुए उक्त अधिकारी ने पत्रकार पर ही रौब झाड़ने लगा उससे तो ऐसा ही लगता है कि स्वच्छता अभियान को छोड़कर कोपर खैरने के मनपा अधिकारी वसूली अभियान चला रहे हैं ?