Month: May 2018

कांग्रेस के वर्कर्स संगठन ने की  प्रलोभन देकर मजदूरों से ठगी

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कांग्रेस के वर्कर्स संगठन ने की प्रलोभन देकर मजदूरों से ठगी

राहुल के नाम पर बना रहे मूर्ख

  1. > जनार्दन सिंह को हटाने की मांग > टछअ-टछउ बनाने का झांसा

  2. > मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष थे अनभिज्ञ

  3. > मुंबई कांग्रेस के पदाधिकारियों में नाराजगी

दबंग दुनिया : नागमणि पांडेय
मुंबई। कांग्रेस के संगठन ‘आॅल इंडिया अनआॅर्गनाइज्ड वर्कर्स कांग्रेस’ की ओर से मजदूरों को पदों का प्रलोभन देकर सदस्यता शुल्क के नाम पर पैसे एेंठने का मामला सामने आया है। असंगठित मजदूरों और हॉकर्स के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाला यह वर्कर्स संगठन सदस्यता लेने वाले कामगारों और हॉकर्स से सबसे पहले 240 रुपए जमा करने की शर्त लगाकर जमकर पैसे एेंठ रहा है। इस शर्त का अघोषित फरमान इस संगठन के मुंबई अध्यक्ष जनार्दन सिंह ने लागू किया है, जिससे मुंबई कांग्रेस के पदाधिकारियों में नाराजगी है। विशेष बात यह है कि यह फरमान राहुल गांधी के नाम से घोषित बताकर मजदूरों को मूर्ख बनाया जा रहा है। कांग्रेस के पदाधिकारियों ने इसकी शिकायत आला कमान से की है।
आॅल इंडिया अनआॅर्गनाइज्ड वर्कर्स कांग्रेस मुंबई के अध्यक्ष जनार्दन सिंह संगठन के पदाधिकारियों को झांसा दे रहे हैं कि जो पदाधिकारी या कार्यकर्ता सर्वाधिक सदस्य जोड़ेगा, उसे भविष्य में आने वाले चुनाव में एमएलए, एमएलसी, और नगरसेवक का टिकट वे राहुल गांधी से कहकर दिला देंगे। इसके साथ ही झांसा दिया जा रहा है कि जो ज्यादा सदस्य बनाएगा, उसे एआईसीसी डेलिगेट बनाया जाएगा। इस झांसे में पड़कर कुछ लोग सदस्यता बढ़ाने में जुटे हैं, इसके लिए बिना रसीद दिए 240 रुपए भी लिए जा रहे हंै।
आरोग्य कार्ड और कानूनी लड़ाई लड़ने का झांसा
आॅल इंडिया अनआॅर्गनाइज्ड वर्कर्स कांग्रेस के मुंबई अध्यक्ष जनार्दन सिंह को अभी कुछ महीने पहले ही नियुक्त किया गया है। दिल्ली में नियुक्ति होने के बाद ये सीधे मुंबई आए। मुंबई आने के बाद मुंबई कांग्रेस संगठन के पदाधिकारियों को बड़े-बड़े पदों का प्रलोभन देकर आॅल इंडिया अनआॅर्गनाइज्ड वर्कर्स कांग्रेस से जोड़ा। इसके बाद उनपर जबरन 1 हजार से 2 हजार तक सदस्यों को जोड़ने का दबाव डालना शुरू किया। इसके लिए जुड़ने वाले सदस्यों से 240 रुपए सदस्यता शुल्क लेने का भी दबाव डाले जाने की जानकारी मुंबई कांग्रेस की काजल मूलचंदानी ने दी है। उन्होंने बताया कि जनार्दन सिंह इन कामगारों को आरोग्य कार्ड और कानूनी लड़ाई लड़ने का आश्वासन देते हैं, लेकिन इस तरह कुछ नहीं होने के कारण अब सब लोग परेशान है। ये लोग अब कांग्रेस कार्यालय का चक्कर लगा रहे है। कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों की ओर से कहा जा रहा है कि इस तरह जबरन सदस्य बनाकर शुल्क वसूलने का सिलसिला गलत है। इसकी शिकायत दिल्ली में आलाकमान से करने के साथ-साथ मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष से भी की गई है।

संजय निरुपम और नसीम खान को पार्टी से बाहर करने का बयान

पार्टी कार्यकर्ताओं और हॉकर्स के सामने जनार्दन सिंह अक्सर कांग्रेस के मुंबई अध्यक्ष संजय निरुपम और विधायक नसीम खान को पार्टी से बाहर कराने की बात कहते हैं। इस तरह का आरोप एक पदाधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर लगाया है।
इसके कारण पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में जनार्दन के प्रति काफी आक्रोश देखा जा रहा है। इसका विरोध करने वाली एक महिला को अशोभनीय बातें भी कहीं गर्इं हैं। इस पर भी उस महिला ने लिखित रूप से ऐतराज जताया है।

पैसा लेकर पद देने का प्रलोभन

मुंबई महिला कांग्रेस की हुमैरा खान ने ‘दबंग दुनिया’ से बात करते हुए बताया कि मैं मुंबई महिला कांग्रेस में पहले से जुड़ी हुई हूं। महिला कांग्रेस के साथ-साथ आॅल इंडिया अनआॅर्गनाइज्ड वर्कर्स कांग्रेस से जुड़कर कामगारों के लिए कुछ किया जा सके, इस उद्देश्य से मैं जुड़ी थी, लेकिन मुझ पर एक हजार सदस्य जोड़ने का दबाव डाला गया। इसके साथ ही 4 -5 लाख रुपए दिए जाने पर उपाध्यक्ष बनाने का प्रलोभन दिया गया। इससे मुझे काभी नाराजगी हुई। इसके बाद जनार्दन सिंह और मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष से इसकी शिकायत करने के साथ ही मैंने आॅल इंडिया अनआॅर्गनाइज्ड वर्कर्स कांग्रेस के इंचार्ज मेहबूब भट्ट से भी शिकायत की है।

फॉर्म पर राहुल और सोनिया गांधी की फोटो

सोनिया गांधी की फोटो

आल इंडिया अनआॅर्गनाइज्ड वर्कर्स कांग्रेस के नाम से बनाए गए सदस्यता फॉर्म पर किसी भी तरह का सीरियल नंबर नहीं है। वहीं फॉर्म पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी की फोटो लगाकर मजदूरों और कामगारों को गुमराह किया जा रहा है। इस फोटो को फॉर्म पर देख लोग, इसे असली समझ रहे हैं और सदस्यता का फॉर्म भरकर जमा कर रहे हैं।

राहुल गांधी के निजी सचिव का दे रहे हवाला

आॅल इंडिया अनआॅर्गनाइज्ड वर्कर्स कांग्रेस के एक सदस्य ने भेजे लेटर में जनार्दन सिंह पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा है कि 240 रुपए लेकर सदस्यता दिए जाने को लेकर जब भी सिंह से पूछा जाता है, तो वह हमेशा राहुल गांधी के निजी सचिव अलंकार का हवाला देकर कहते हैं कि उन्हें सब पता है।
पैसा लेकर सदस्यता देने के संदर्भ में मुझे कोई जानकारी नहीं है। इस बारे में जनार्दन सिंह ही सच्चाई बता सकते हैं।

– संजय निरुपम, अध्यक्ष, मुंबई कांग्रेस

मै

कई वर्षों से नागपाड़ा और आसपास के परिसरों में फेरीवालों के लिए कार्य कर रहा हूं। जनार्दन सिंह ने मुझे आॅल इंडिया अनआॅर्गनाइज्ड वर्कर्स कांग्रेस से फरवरी 2018 में जोड़ा और उपाध्यक्ष पद दिया। मैंने अभी तक लगभग 80 फेरीवालों को जोड़ा, लेकिन अभी तक कोई रसीद नहीं दिया गया है। सिर्फ आॅल इंडिया अनआॅर्गनाइज्ड वर्कस कांग्रेस का कार्ड दिया गया है, लेकिन जितना बताया गया, उसमें से अभी तक उनका कोई काम नहीं किया गया है।

-फहीम, उपाध्यक्ष, आॅल इंडिया अनआॅर्गनाइज्ड वर्कर्स कांग्रेस

मुझे शुरुआत में आॅल इंडिया अनआॅर्गनाइज्ड वर्कस कांग्रेस के सोशल मीडिया का इंचार्ज बताकर जोड़ा गया। इसका कोई नियुक्ति पत्र अभी तक नहीं दिया गया है। ऊपर 240 रुपए लेकर सदस्य बनाने का दबाव डाला जा रहा है। इस मामले में कांग्रेस आलाकमान को भी गंभीरता से लेना चाहिए, ताकि मजदूरों और असंगठित कामगारों के बीच कांग्रेस की छवि नहीं खराब हो। मुंबई में बहुत बड़ी आबादी असंगठित मजदूरों की है। उन्हें पार्टी से जोड़ा जाना जरूरी है, ताकि भविष्य में कांग्रेस पार्टी का वोट बैंक बढेÞ, लेकिन राहुल गांधी के नाम पर मनमानी कर रहे लोग जनार्दन सिंह को पैसे नहीं दे सकते।

– काजल मूलचंदानी, प्रवक्ता, मुंबई कांग्रेस विचार विभाग

हमने नियम के अनुसार मजदूरों की लड़ाई लड़ने के लिए सदस्यता शुल्क निर्धारित किया है। पार्टी द्वारा मंजूरी के बाद ही यह सदस्यता शुल्क लिया जा रहा है। सभी दलों द्वारा लिया जाता है। इसमें कुछ गलत नहीं है। (धमकी देते हुए)…मैं कई वर्षों तक पत्रकार रहा हूं। संपादकों से ताल्लुक रखता हूं। मुझे पत्रकारिता अच्छी तरह पता है, आप इस तरह से बात नहीं करें।

– जनार्दन सिंह, अध्यक्ष, आॅल इंडिया अनआॅर्गनाइज्ड वर्कर्स कांग्रेस, मुंबई

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नवी मुंबई मनपा में 1200 करोड़ का टैक्स घोटाला

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मुंबई। नवी मुंबई महानगरपालिका का संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) विभाग एक बार फिर बड़े घोटाले को लेकर चर्चा में है। इस विभाग में 1200 करोड़ का टैक्स घोटाला सामने आया है। इस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी फर्जी कागजातों के आधार पर अवैध झोपड़ियों, मकानों और इमारतों के प्रॉपर्टी टैक्स का बिल जारी कर रहे हैं। ज्ञात हो कि एक-एक बिल के बदले 15 से 20 हजार रुपए की वसूली की जा रही है। इतना ही नहीं जिन उद्योगपतियों और भवन निर्माताओं का संपत्ति कर बड़े पैमाने पर बकाया है, उनकी राशि को कम करने का भी एक बड़ा खेल इस विभाग में जारी है। कुछ मामलों में तो बैक डेट का बिल भी जारी किया जा रहा है, जिससे वर्ष 2015 तक के सभी अवैध निर्माण कार्यों को अधिकृत किए जाने के नियम के तहत, उन्हें इसका फायदा मिल सके।
कुछ ऐसे दस्तावेज प्राप्त हुए हैं, जिसमें एक एक घरपट्टी पर 50-50 संपत्ति कर के बिल जारी किए गए हैं और आश्चर्य की बात यह है कि ऐसे घोटालों की संख्या सैकड़ों में है। दरअसल संपत्ति कर के बिल को प्रॉपर्टी कार्ड का दर्जा प्राप्त है, इसलिए जहां कहीं भी अवैध बहुमंजिली इमारतों का निर्माण किया गया है, वहां पहले एक घरपट्टी के नाम पर संपत्ति कर का बिल जारी किया गया और बाद में उसी घरपट्टी के ऊपर अलग-अलग रूम की संख्या डालकर अनेक संपत्ति कर के बिल जारी कर दिए गए। संपत्ति कर का बिल जारी किए जाने के नियम के मुताबिक इसके लिए कई प्रकार के दस्तावेजों की जरूरत होती है, मगर नवी मुंबई पालिका के संपत्ति कर विभाग में 15 से 20 हजार की रकम के आगे सारे दस्तावेज के महत्व नगण्य हो जाते हैं।
नवी मुंबई मनपा संपत्ति कर विभाग के अधिकारियों के भ्रष्टाचार इतने फैल गए हैं कि वे बड़े-बड़े उद्योगपतियों और भवन निर्माताओं के लाखों करोड़ों रुपए की संपत्ति कर गुलाबी नोट के प्रभाव में आकर माफ कर रहे हैं। इसके लिए विभाग के अधिकारी सारे नियम कानून को ताक पर रख इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। इस तरह से अवैध समझौतों का खेल शुरू हो जाता है। इस मामले में संपत्ति कर विभाग के उपायुक्त अमरीश पटनीगिरी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हुआ।
संपत्ति कर विभाग में 1200 करोड़ के इस घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद मैंने इसकी शिकायत वर्तमान आयुक्त रामास्वामी से की है, लेकिन अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कोई जांच भी नहीं हुई है। पूर्व पालिका आयुक्त तुकाराम मुंढे के कार्यकाल के दौरान 1200 करोड़ के संपत्ति कर घोटाले की बात सामने आई थी, जिसकी जांच रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। लेकिन इसके बावजूद इस विभाग में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। इस संदर्भ में कुछ ठोस सबूत मनपा आयुक्त के सामने पेश किया गया है और यह मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण की जांच गंभीरता से की जानी चाहिए।

साईबाबा संस्थान ट्रस्ट का लाखों का घोटाला

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साईबाबा संस्थान ट्रस्ट का लाखों का घोटाला
नागमणी पांडेय दबंग दुनिया
मुंबई।शिर्डी के ‘श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट’ ने वर्ष 2015 के सिंहस्थ कुंभ मेले की भीड के प्रबंधन हेतु पुलिस की मांग के अनुसार सुरक्षा सामग्री खरीदी। सूचना अधिकार से मिली जानकारी से स्पष्ट हुआ कि अहमदनगर पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा दी गई अनुमानित दरों की अपेक्षा अत्यधिक उच्च दर से यह सामग्री खरीदी गई। उदाहरणार्थ 60 हजार रुपयों की मनीला रोप (रस्सी) (10 हजार मीटर लंबी) 18 लाख 50 हजार रुपए में, 400 रुपए प्रति नग ‘रिचार्जेबल टॉर्चेस’ प्रति नग 3 हजार रुपयों में, 2 हजार रुपयों का ‘साईन बोर्ड’ 9 हजार 200 रुपयों में, और 5 हजार रुपयों का ताडपत्र 22 हजार 575 रुपए इतनी ऊंची दर में खरीदा गया।
ॅ इस खरीद में ऊंची दरों के रूप में खर्च हुए 66 लाख 55 हजार 997 रुपए, भ्रष्टाचार स्पष्ट करते हैं। इस प्रकरण में 16 दिसंबर 2016 को महाराष्ट्र शासन ने श्री साईबाबा संस्थान से स्पष्टीकरण मांगा। वह पत्र भेजकर आज सवा वर्ष हो गया; परन्तु उसका कोई उत्तर ही नहीं मिला। इस कारण संदेह है कि ये सब अनियमितताएं दबाई जा रही हैं। एक ओर जहां मा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘भ्रष्टाचारमुक्त भारत’ का दावा कर रहे हैं; वहीं राज्य के मुख्यमंत्री मा. देवेंद्र फडणवीस इस भ्रष्टाचार के विषय में निश्‍चित रूप से क्या कर रहे हैं, ऐसा प्रश्‍न हिन्दू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने उपस्थित किया।
ॅ 24 मई 2018 इस दिन मुंबई मराठी पत्रकार संघ मे आयोजित पत्रकार परिषद में वे बोल रहे थे। इस समय हिन्दू जनजागृति समितिके प्रवक्ता श्री. सतीश कोचरेकर, सनातन संस्था से सौ. सुनीता पाटील भी उपस्थित थे।
आर्थिक व्यवहार पर शासन का नियंत्रण नहीं
ॅ वर्ष 2015 सिंहस्थ के काल में शिर्डी पुलिस को सौंपी गई वस्तुएं संस्थान ने अभी भी अपने पास वापस जमा नहीं की। ताडपत्र, रस्सी आदि वस्तुओं के उपयोग के विषय में न शिर्डी संस्थान ने ब्यौरा मांगा, ना ही पुलिस ने दिया। सूचना अधिकार में जब यह पूछा गया कि ‘इन वस्तुओं का क्या उपयोग किया गया ?’, तब ‘इन वस्तुओं का उपयोग 2018 में होनेवाले ‘साई महासमाधी शताब्दी समारोह’ में होगा’, साई संस्थान ने ऐसा टुटपुंजा कारण बताया। 2015 में खरीदी वस्तुओं का उपयोग 2018 में करना, आर्थिक व्यवहार नहीं सीधे-सीधे भ्रष्टाचार है। इसकी जांच होनी चाहिए। ये सब वस्तुएं केवल कागजों पर होने की भी संभावना है। पुलिस की मांग के अनुसार शिर्डी संस्थान ने संगणक, प्रिंटर, रिसोग्राफर, दो एयरकंडीशनर जैसी वस्तुएं भी पुलिस को दी हैं। इनमें से रिसोग्राफर, दो एयरकंडीशनर की पुलिस को क्या आवश्यकता है? इसकी भी जांच होनी चाहिए।
प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग
ॅ इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय अधिकारियों द्वारा जांच की जाए। सामग्री का प्रत्यक्ष संग्रह गिना जाए और उसमें घोटाला पाए जोनपर, पुलिस और संस्थान के संबंधित अधिकारी/कर्मचारी इन पर तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
सिंहस्थ समाप्त होने पर मिली वस्तुओं का दायित्व किसका?
ॅ शिर्डी पुलिस थाना परिसर में कुंभमेला समाप्त होनेपर, जनवरी 2016 में ‘वायरलेस टॉवर’ बनाया गया। प्रिंटर, संगणक, जेरॉक्स यंत्र, 200 यातायात पुलिस-बैटरी स्टिक सहित ढेर सारी सामग्री शिर्डी संस्थान ने 11 सितंबर 2015 को अर्थात कुंभमेला समाप्त होनेपर, लेने के लिए शिर्डी पुलिस थाने को सूचित किया है। कुंभमेला समाप्त होने पर ये सामग्री लेकर पुलिस ने उसका क्या किया ? वर्षा समाप्त होने के उपरांत अर्थात 21 सितंबर 2015 को रेनकोट मिले। पुलिस को उनकी मांग के अतिरिक्त दिए 300 लोहे के बैरिकेड्स क्या संस्थान को वापस मिले ? इन बैरिकेड्स का खर्च किस अधिकार के अंतर्गत किया गया, ऐसे अनेक प्रश्‍न अनुत्तरित हैं।
ॅ संक्षेप में मुख्यमंत्री के अधिकार-क्षेत्र में विधि और न्याय विभाग के अंतर्गत आनेवाला यह पूरा व्यवहार संदेहास्पद और गंभीर है। कानून-व्यवस्था, शासन का दायित्व है। ऐसे कार्यक्रमों से शासन की अप्रत्यक्ष आय भी होती है। तब भी भक्तों द्वारा परिश्रमपूर्वक अर्जित मंदिर की धनराशि का इस प्रकार उपयोग किया जाता है, तो क्यों न राजनीतिक दलों के धन का उपयोग चुनाव के खर्च के लिए तथा अन्य सामाजिक कार्यों के लिए किया जाए ? ऐसा प्रश्‍न भी अधिवक्ता इचलकरंजीकर ने परिषद को संबोधित करते हुए उपस्थित किया।
परियोजना के लिए दिए 500 करोड की जांच की जाए!
ॅ हिन्दू जनजागृति समिति के प्रवक्ता कोचरेकर ने कहा, पिछले 45 वर्षों से घिसट रही अहमदनगर जिले की ‘निळवंडे बांध एवं नहर’ परियोजना के लिए, मुख्यमंत्री ने शिर्डी संस्थान की संपत्ति में से 500 करोड रुपए दिए। किसानों को पानी मिलना और भूमि की सिंचाई होना भी आवश्यक है परन्तु उसके लिए सारे नियमों को ताक पर रखकर, धनराशि देना अनुचित है। निळवंडे बांध की नहर के लाभक्षेत्र में शिर्डी गांव नहीं आता, तब भी ‘श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट (शिर्डी) कानून 2004’ को भंग करते हुए यह धनराशि क्यों दी जा रही है? शासन एवं अधिकारियों की कामचोरी के कारण 45 वर्षों से इस नहर का कार्य कूर्म गति से चल रहा है। सिंचाई ज्वलंत समस्या है; परंतु 70 हजार करोड रुपयों के सिंचाई घोटाले के दोषियों को दंड देकर, उनसे पैसे वसूल करने का आश्‍वासन पूर्ण नहीं किया।
ॅ इस विषय में अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने कहा, भाजपा को सिंचाई की चिंता है, तो पहले अपने दल की अरबों की संपत्ति से ये सामाजिक काम करें। ‘पहले शासन की तिजोरी भ्रष्टाचार कर, खाली करना; फिर अपने दल की तिजोरी भरना और अंत में श्रद्धालुओं के धन को हडप कर सामाजिक कार्य करने का दिखावा करना’! यह राजनीति अब श्रद्धालु नहीं सहेंगे। इसके विरोध में आवाज उठाई जाएगी।