Month: August 2016

नवीं मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से 2019 तक उड़ाने शुरू होने पर संशय

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नवी मुंबईनवी मुंबई एयरपोर्ट से पहली फ्लाइट शायद ही 2019 में उड़ान भर पाए. एयरपोर्ट के लिए बोली लगाने में चौथी भागीदार को सुरक्षा मंजूरी तो मिल गई है, लेकिन अब बोली प्रक्रिया जिसे सितंबर में होना था, की अवधि को और आगे बढ़ाया जाएगा. लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी विस्थापितों का पुनर्वास है जो अभी तक अपनी जमीन छोड़ने को पूरी तरह से तैयार नहीं हैं.

नवी मुंबई में उलवे के आस-पास का इलाका नए एयरपोर्ट के लिए तैयार हो रहा है. पहाड़ काटे जा रहे हैं. इलाके में बड़ी-बड़ी मशीनें और ट्रक नजर आ रहे हैं. चिंचपाड़ा जैसे गांव नवी मुंबई बसाने के लिए 40 साल पहले भी अपनी जमीन, खेत-खलिहान कुर्बान कर चुके हैं. इन गांवों के लोगों का आरोप है कि मुआवजे के नाम पर शहर के प्रशासक सिडको की बेरुखी से उनके जख्म हरे हो जाते हैं.

चिंचपाड़ा के मोहन परदेसी ने साफ कह दिया है वे अपनी जमीन बगैर बुनियादी सुविधाओं के नहीं छोड़ेंगे. वहीं संजय पाटिल का कहना है कि उनकी जमीन लीज़ पर ली जा रही है, ऊपर से स्कूल, ड्रेनेज, अस्पताल जैसी सुविधाएं नहीं दी गई हैं. ऐसे में वे अपनी जमीन कैसे दे सकते हैं. चिंचपाड़ा के सरपंच शशिकांत भोईर का कहना है हम चाहते हैं देश की प्रगति हो, हम उसमें अवरोध नहीं बनेंगे, लेकिन हम अपनी जमीन अपना घर छोड़ रहे हैं ऐसे में हमारी सारी मांगें मानी जानी चाहिए.दस गांवों के तकरीबन 3000 लोग पुनर्वास पैकेज को मान चुके हैं. अगस्त के बाद उन्हें जमीन खाली करनी थी. हवाई पट्टी और बुनियादी सुविधाओं के लिए ही 671 हैक्टेयर जमीन की जरूरत है. इसमें से 556 हैक्टेयर पर खेत हैं. परियोजना के लिए लोगों के घर, खेत सब अधिगृहीत किए जाएंगे लेकिन पुनर्वास के पुराने अनुभवों के आधार पर खुद सिडको भी मानती है कि लोगों के मन में शंका है. सिडको के जनसंपर्क अधिकारी मोहन निनावणे का कहना है कि ”90 के दशक में जिन लोगों से जमीन ली गई थी उनसे किए गए कई वादे पूरे नहीं हुए हैं. ऐसे में विस्थापितों के मन में संशय है. लेकिन विमानतल के लिए किया जा रहे जमीन अधिगृहण में विस्थापितों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है.”


नवी मुंबई एयरपोर्ट का बुनियादी काम दिसंबर 2016 तक शुरू करने और दिसंबर 2019 में खत्म करने का लक्ष्य है. नए एयरपोर्ट से एक करोड़ मुसाफिर और 2.3 लाख टन माल ढुलाई करने की कोशिश है. कुछ दिनों पहले नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू के कल्याण एयरपोर्ट के हवाई दौरे से कयास लगे कि शायद नवी मुंबई एयरपोर्ट को शिफ्ट किया जा सकता है, लेकिन बाद में सफाई आई कि इस दौरे का मकसद सिर्फ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की संभावनाएं तलाशना था.

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प्राइवेट अस्पतालों के सहारे नवी मुंबई कर 

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मनपा अस्पतालों में बैड का पड़ा अकाल 

सिखाऊ  डॉक्टरों से चल रहा अस्पताल 

उपचार में देरी से डेंगू के मरीज का हुआ मौत

रेनू मिश्रा 
नवी मुंबई:डेंगू के शिकार नवी मुंबई  के वाशी में रहने वाले  एक नागरिक को समय पर उपचार नही मिलने  के कारण कामोठे स्थित एमजीएम अस्पताल में उपचार के दौरान मौत होने का मामला सामने आया है । इस के बाद से स्मार्ट सिटी के रूप में पहचाने  मुम्बई के नागरिको में मनपा अस्पताल के उपचार को लेकर कई सवाल खड़े किये जा रहे है । 

               प्राप्त जानकारी अनुसार वाशी सेक्टर-15  स्थित एक सोसायटी में पिछले १७ वर्षो से सुरक्षा रक्षक का काम करने वाले हरिशंकर तिवारी(50 ) का मौत पिछले सप्ताह डेंगू से हो गया । हरिशंकर के एक रिश्तेदार ने बताया की उन्हें बुखार  जुहू गाव स्थित एक डॉक्टर के पास ब्लड की जांच कराया गया । उसमे उन्हें डेंगू होने की जानकारी हुआ जिसके बाद से डेंगू का उपचार सुरु किया गया । कुछ दिन उपचार के दौरान घर पर बाथरूम में जाते समय अचानक गिर गए । जमीन  पर गिरने  से उनके सर में मार लग गया और खून बहने  लगा । इसके बाद उन्हें तुरंत वाशी स्थित मनपा अस्पताल में उपचार के लिए ले जाया गया । वंहा ले जाने पर सबसे पहले वंहा पढाई कर रहे डॉक्टर  जांच करना सुरु किये | लेकिन खून बहना बंद नही हुआ | उन्हें बताया गया भी की डेंगू का उपचार सुरु है | इस के बावजूद सिखाऊ डॉक्टर सिर्फ देखे | जिसके बाद मौजूद आरएमओ ने उन्हें वंहा बैड नही होने का कारण देकर दुसरे अस्पताल ले जाने का सलाह दिया | इसके बाद हरिशंकर के परिजनों ने उन्हें तुरंत नेरुल के डी वाय पाटिल अस्पताल में भर्ती किये वंहा भी लगभग 3 घंटे तक उपचार करने के बाद डॉक्टर ने दुसरे अस्पताल ले जाने का सलाह दिया | जिसके बाद परिजनों ने उन्हें कामोठे एमजीएम अस्पताल में भर्ती किये | तब तक शाम हो चुके थे और उपचार में देरी हो चूका था | इसके बावजूद डॉक्टर उपचार सुरु किये | वंहा जांच में जानकारी हुआ की उनका प्लेट लेट 15 हजार पर aa चूका है | इसके बाद उनके परिजनों ने प्लेट लेट का लाये और उपचार सुरु किया गया | वंहा भी उपचार के दौरान दुसरे दिन उनके मौत हो गयी | डॉक्टर ने उपचार के दौरान बताया भी था की उपचार में देरी हुआ है | 
     सिखाऊ डॉक्टरो के सहारे मनपा अस्पताल 
   हरिशंकर तिवारी का  उपचार करा रहे रिश्तेदारों ने मनपा अस्पताल पर आरोप लगाया की सबसे पहले जब नवी मुंबई मनपा अस्पताल ले गए तो वंहा कोई डॉक्टर ने जांच नही किया जब की उनका खून काफी बह रहा था | सिर्फ जो डॉक्टर पढ़ रहे है वंही जांच किये उनसे बोले भी खून बह रहा है आप रोकिये | लेकिन डॉक्टर बोले की जगह नही है आप दुसरे अस्पताल ले जाए | सुबह से लेकर शाम तक सिर्फ इस अस्पताल से उस अस्पताल चक्कर लगाते रहे | आखिर कार उपचार में देरी होने के कारण उनका मौत हो गया | 

      मनपा अस्पताल में बैड का अभाव 
 नवी मुंबई में पिछले कुछ दिनों से डेंगू और मलेरिया जैसे बिमारी से ग्रस्त नागरिको की संख्या में बढ़ोतरी हुआ है जिसके कारण वाशी मनपा अस्पताल में पुरे बैड भरे हुए | तुर्भे में रहने वाले एक नागरिक ने बताया की लगभग 10 दिन पहले ममता पाण्डेय नाम की लड़की को अचानक सांस लेने में तकलीफ होने लगा । तब उसे वाशी मनपा अस्पताल में ले गए । वंहा कुछ देर तक ऑक्सीजन पर रखा गया जिसके बाद उसे आराम हो गया । लेकिन कुछ देर बाद वापस वंही तकलीफ होने लगा । इस की जानकारी डॉक्टर को देने पर वंहा मौजूद सिखाऊ  डॉक्टर उपचार करने के बजाय बोलने लगी की यह लड़की नाटक कर रही है लेकिन जब परिजन बोले की वह रो रही है और आप बोल रहे है की  नाटक कर रही । इसके बाद आरएमओ ने जगह नही होने का कारण देकर नेरुल स्थित डी वाय  पाटिल अस्पताल में भेज दिया । वंहा उपचार करने के बाद डॉक्टरों ने दवा देकर छोड़ दिया । इस तरह से मरीजो का उपचार किये बिना मनपा अस्पताल में बैड नही होने के कारण नागरिको का आरोप है की आखिर इमरजेंसी में कंहा  जाए ? 

छात्रा के पत्र  को मोदी ने लिया गंभीरता 

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स्कुल में नही खेलने का मैदान 

रेनू मिश्रा
नवी मुंबईः स्कुल में खेलने का मैदान नही होने के कारण पनवेल के एक स्कुल में 9 वी कक्षा में पढने वाली छात्रा ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है । विशेष की मोदी ने इस पत्र को गंभीरता से लेते हुए सीधे सिडको को मैदान उपलब्ध कराने का आदेश दिया है ।

            प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने वाली छात्रा का नाम साक्षी तिवारी है । कलंबोली स्थित   न्यू मुंबई इंग्लिश स्कूल में पढने वाली साक्षी ने मोदी को लिखे पत्र में बताया हैं की स्कुल में खेलने का मैदान नही होने के कारण सभी छात्र नाराज है । इस पत्र को गंभीरता से लेते हुए मोदी ने सिडको को आदेश दिया है की स्कुल के लिए मैदान उपलबध करा कर दे ।साक्षी के पत्र को मोदी द्वारा लिए गए गंभीरता को देखकर शिक्षको और छात्रो में ख़ुशी की लहर देखी जा रही है । 

मनसे पदाधिकारियो सहित 19 गोविंदा पथको पर मामला दर्ज

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुलेआम अवहेलना

नवी मुंबई:सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का खुलेआम अवहेलना करने और दही हंडी फोड़ने आये गोविंदा पथकों को उकसाने. 18 वर्ष की कम उम्रवाले लड़कों का थर लगाने के लिए उपयोग में लाने आदि जैसी धाराओं के तहत नौपाड़ा पुलिस ने ठाणे के महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के शहराध्यक्ष व आयोजक अविनाश जाधव, संपर्क अध्यक्ष अभिजीत पानसे सहित कुल 19 गोविंदा पथकों के विरुद्ध मामला दर्ज किया है. 
   गौरतलब है कि ठाणे में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की तरफ से नौपाड़ा परिसर में भगवती स्कुल मैदान में 9 थर लगाने वाले मंडलों को 11 लाख रूपए का पुरष्कार देने की घोषणा की थी. जिसके कारण इस दहीहांडी की तरफ सभी की निगाहें टिकी हुई थी. यहीं कारण है कि पुलिस सुबह से इस दही हंडी महोत्सव पर विशेष वाच रखा हुआ था. इतना ही नहीं यहाँ पर ठाणे क्राईम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त पराग मनेरे, परिमंडल एक के उपायुक्त अभिषेक त्रिमुखे, क्राईम ब्रांच के सहायक पुलिस आयुक्त भरत शेलके, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक नितिन ठाकरे, नौपाडा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक गजानन काब्दुले जैसे अधिकारी मौजूद थे. यहाँ के आयोजक और मनसे के शहर अध्यक्ष अविनाश जाधव ने सुबह 11 से लेकर  दोपहर 2.30 बजे तक 18 वर्ष के कम उम्र वाले गोविन्दाओं को भी थर लगाने के लिए प्रोत्साहित किया. इतना ही नहीं हंडी भी शुरुवाती दौर में 49 फुट की बाँधी थी. लेकिन पुलिस की मध्यस्थता और चेतावनी देने के बाद इसकी उंचाई कम कर 20 फुट तक लाइ. लेकिन इस दौरान यहाँ पर कोर्ट की अवहेलना जारी रहा और गोविंदा पथकों ने नौ थर अर्थात 45 फुट तक थर लगाकर सलामी दी. जिसे ध्यान में रखते हुए नौपाड़ा पुलिस ने 20 फुट से अधिक का थर लगाने के लिए फौजदारी दंड प्रक्रिया संहिता कलम 149 तथा महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 68 प्रमाणो नोटीस बजाने के बावजूद कार्यक्रम का आयोजन किये जाने के लिए उत्सव के आयोजक अविनाश जाधव और संपर्क अध्यक्ष  अभिजित पानसे सहित कुल 19 गोविंदा मंडलों के विरुद्ध भा.द.वि,स की धारा 308, 336,188,34 के तहत मामला दर्ज किया है.  खबर लिखे जाने तक इस मामले में किसी के खिलाफ कार्यवाही नही किया गया था ।

क्या अब कायदे क़ानून से चलेगी महासभा !

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नवी मुंबई :दो दशक पुरानी  नवी मुंबई महानगरपालिका में अब प्रशासन और जन प्रतिनिधियों के बीच टकराव अब गहरा गया है . पिछली महासभा की बैठक जब सभी दलों के नगरसेवकों ने आयुक्त तुकाराम मुंढे को बाबा साहब अम्बेडकर भवन के मुद्दे पर घेरने की कोशिश की थी . आयुक्त ने अम्बेडकर भवन में मार्बल लगाने के प्रस्ताव को जब नकार दिया तो 16 अगस्त की महासभा बैठक में नगरसेवकों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाकर करीब 6 घंटे तक अप्रत्यक्ष रूप आयुक्त पर वार किये .इस चर्चा से परेशान होकर मनपा आयुक्त ने महासभा की स्थगित बैठक जो 19 अगस्त को होने वाली थी में मनपा आयुक्त ने नजरअंदाज करते हुए बैठक में हिस्सा नहीं लिया . बताया जाता है कि आयुक्त को इस बैठक में नगरसेवकों की रणनीति का आभास हो गया था . उक्त बैठक में पेयजल के प्रस्ताव पर चर्चा होंने वाली थी .लेकिन आयुक्त की अनुपस्थिति की वजह बैठक फिर से स्थगित कर दी गयी .मंगलवार 23 अगस्त को यह बैठक होने वाली है . इसी बीच मनपा आयुक्त ने मुंबई म्युनिसिपल एक्ट का हवाला देते हुए एक नोटिस जारी किया है . इस नोटिस के तहत नगरसेवकों को निर्देश दिया गया है कि कोई भी ध्यानाकर्षण प्रस्ताव महासभा में चर्चा के लिए तभी लाया जा सकता है जब तक उसकी पूर्वानुमति नहीं ली जाती . नोटिस में कहा गया कि करीब तीन घंटे पहले महापौर और आयुक्त के समक्ष ध्यानाकर्षण प्रस्ताव देना होगा और स्वीकृत होने के बाद उस पर चर्चा होगी .बताया जाता है कि  विगत 22 सालों तक महासभा की बैठकों में लाये जाने वाले ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर इस तरह की प्रक्रिया की अनुपालना नहीं की जाती रही है . इस प्रकार के प्रस्तावों पर महासभाओं व स्थायी समिति की बैठकों में घंटों चर्चाएँ होती रही हैं . इन चर्चाओं में जमकर आरोप प्रत्यारोप भी होते रहे हैं .लेकिन आयुक्त तुकाराम मुंढे ने ध्यानाकर्षण प्रस्तावों को लेकर होने वाले अप्रत्यक्ष हमलों से बचने के लिए क़ानून की धाराओं का सहारा लिया . वैसे मनपा की बैठकों में होने वाली चर्चाओं पर कई बार सवालिया निशान लगे हैं .नगरसेवकों को सभाओं में चर्चा की तरह से की जाती है इस बात का प्रशिक्षण हर बार स्थानिक स्वराज संस्था के अधिकारियों द्वारा दिया जाता है . इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए मनपा को स्थानिक स्वराज विभाग को भुगतान भी करना पड़ता है . लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम गिने चुने नगरसेवक ही उपस्थित रहते हैं .लेकिन उस प्रशिक्षण के बाद भी इन तकनीकी बातों पर ध्यान नहीं दिया जाता रहा है . इस गलती के लिए मनपा  प्रशासन की जवाबदेही ज्यादा है .अब चूंकि मनपा आयुक्त की कड़ाई की वजह से मनपा अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों में टकराव बढ़ा है तो जवाब कायदे क़ानून की भाषा में दिया जाने लगा है .सबसे बड़ी जवाबदेही मनपा सचिव की होती है क्योंकि इन सभाओं की कार्यवाही क़ानून के दायरे में चलवाने का काम उसी का होता है . सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने सालों तक मनपा सचिव क्या कार्य करता रहा है .अब जब टकराव की स्थिति बनी है तो कायदे कानूनों का सहारा लिया जा रहा है .

मुख्यमंत्री के सचिवालय में सबसे अधिक शिकायतें गृह विभाग की

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मुख्यमंत्री के सचिवालय में सबसे अधिक शिकायतें गृह विभाग की
टॉप 5 में गृह, राजस्व, नगर विकास, सामान्य प्रशासन और ग्रामीण विकास महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सचिवालय में सबसे अधिक शिकायतें गृह विभाग से प्राप्त होती हैं। गत 20 महीने में 71,475 शिकायत आने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को मुख्यमंत्री सचिवालय ने दी हैं। कुल 2,44,112 शिकायतों में टॉप 5 में गृह, राजस्व , नगर विकास, सामान्य प्रशासन और ग्रामीण विकास का नंबर लगता हैं। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री सचिवालय में जानकारी मांगी थी कि विभिन्न विभाग को कितनी शिकायते प्राप्त होती हैं और कितनी शिकायते प्रलंबित हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय की जन सूचना अधिकारी और कक्ष अधिकारी वैशाली चवाथे ने अनिल गलगली को 1 नवंबर 2014 से 30 जून 2016 इन 20 महीनों में प्राप्त 31 विभागों की जानकारी पेन ड्राइव में दी। इन 31 विभागों में गत 20 महीने में कुल 2,44,112 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें सबसे अधिक शिकायतें मुख्यमंत्री के अधिनस्थ गृह, नगर विकास और सामान्य प्रशासन विभाग से हैं।सबसे अधिक 71,475 शिकायतें गृह विभाग की हैं। राजस्व और वन विभाग की शिकायतों की संख्या 24,293 हैं। 15,388 नगर विकास, 9,461 सामान्य प्रशासन, 9,368 ग्रामीण विकास ऐसी क्रमवारी हैं। इन 5 विभागों के शिकायतों की संख्या 53.24 प्रतिशत हैं। मुख्यमंत्री सचिवाली को महीने को लगभग 12,205 शिकायतें प्राप्त होती हैं। कुल 31 विभागों में टॉप 5 के बाद जिन विभागों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं उनमें 6382 पशु संवर्धन और डेरी, 724 मुख्य सचिव, 1189 सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय, 7776 वस्त्रोद्योग और पणन, 602 रोजगार और स्वंयरोजगार, 667 पर्यावरण, 2288 वित्त, 2875 खाद्य आपूर्ति, 3693 उच्च व तंत्र शिक्षा, 8608 गृह निर्माण, 8765 उद्योग, उर्जा और कामगार, 4640 विधी व न्याय, 181 मराठी, 2458 वैद्यकीय शिक्षा, 924 अल्पसंख्याक, 107 संसदीय कार्य, 1186 नियोजन, 4193 सार्वजनिक स्वास्थ्य , 5166 सार्वजनिक निर्माण , 7101 शालेय शिक्षा, 3877 सामाजिक न्याय, 845 पर्यटन व सांस्कृतिक, 807 आदिवासी, 1830 जल संसाधन, 597 जलापूर्ति और 370 महिला व बाल विभाग का शुमार हैं। रोजगार और स्वयंरोजगार विभाग का रेकॉर्ड नहीं रोजगार और स्वयंरोजगार विभाग का 12 महीने का रेकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का दावा मुख्यमंत्री सचिवालय ने किया हैं। 1 नवंबर 2014 से 31 दिसंबर 2014 तक 55 और 1 जनवरी 2015 से 30 जून 2015 तक 547 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उसके बाद का रेकॉर्ड न होने का दावा किया हैं। वहीं वस्त्रोद्योग और पणन की 60 और उच्च तंत्र शिक्षा विभाग की 2 शिकायतें प्रलंबित हैं। अनिल गलगली ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे हुए पत्र में उनका ध्यानाकर्षण किया हैं कि तकरीबन सभी विभागों में आम नागरिकों की शिकायतों का निदान नहीं होता हैं। फलस्वरुप मुख्यमंत्री सचिवालय में शिकायतों की संख्या बढती जा रही हैं। शिकायत निवारण यंत्रणा को मजबूती देकर उस उस विभाग के मुखिया को योग्य आदेश दिया जाएगा तो शिकायतों की संख्या कम होगी और मुख्यमंत्री सचिवालय को सकारात्मक काम करने के लिए और समय मिलेगा। शिकायत बढ़ने से विभाग की जिम्मेदारी जिनपर सौंपी हैं वे लापरवाह होने की बात सामने आ रही हैं जिनपर तत्काल करने की जरुरत होने की मांग अनिल गलगली ने की हैं।